बूंदी के गागोस गांव निवासी खुशबू भील के नौ माह के गर्भ में बच्चे की मौत मामले में मंगलवार को परिजन राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सीएमएचओ ओपी सामर से मिले। परिजनों ने दोषी चिकित्साकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। परिजनों ने आरोप लगाया कि खुशबू को हिंडोली राजकीय अस्पताल में तीन दिन तक भर्ती रखा गया, लेकिन समय पर रेफर नहीं किया गया। इसी चिकित्सकीय लापरवाही के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। पीड़िता की मां संतरा भील ने सीएमएचओ के सामने कहा कि मेरी बेटी दर्द से तड़प रही थी, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ इलाज करने की जगह टालते रहे। नर्स ने पैसे मांगे, फिर सीने पर चढ़कर पेट दबाया संतरा भील और पीड़िता के पति मुकेश भील ने बताया कि अस्पताल में कार्यरत एक नर्स ने इलाज शुरू करने और डिलीवरी करवाने के लिए पैसों की मांग की। मजबूरी में परिजनों ने 500 रुपए दिए, लेकिन नर्स ने और पैसों की मांग की। मुकेश ने आरोप लगाया-पैसे देने के बाद नर्स खुशबू के सीने पर चढ़ गई और जोर-जोर से पेट दबाने लगी। दर्द बढ़ता गया, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई। कई बार बूंदी रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन स्टाफ जिद पर अड़ा रहा और रेफर नहीं किया। जब गर्भ में बच्चा मर गया, तब जाकर रेफर किया गया। समय पर रेफर करते तो बच जाती जान परिजनों का कहना है कि पैसे और रिश्वत के लालच में खुशबू को तीन दिन तक वहीं रोके रखा गया। अगर डॉक्टर समय पर रेफर कर देते, तो बच्चा बच सकता था। आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता जगरूप सिंह रंधावा, युवा कांग्रेस जिला महासचिव अक्षत शर्मा, ओमप्रकाश भील, चेतन रैगर, कैलाश बाई, जसवीर बैरवा और साहिल कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर आक्रोश व्यक्त किया। चर्मेश शर्मा ने कहा- अमानवीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा ने सीएमएचओ के समक्ष कहा- अस्पताल लोगों की जान बचाने के लिए होते हैं, लेकिन यहां भ्रष्टाचार और गैरजिम्मेदारी से गर्भ में ही बच्चों की जान ली जा रही है। यह शर्मनाक और दुखद है। ऐसी अमानवीय लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


