नन्हे कलाकार फेस्टिवल के चौथे संस्करण का आगाज जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में हुआ। एयू फाउंडेशन, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान युवा बोर्ड, जवाहर कला केंद्र और अभ्युत्थानम वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस फेस्टिवल का उद्घाटन हवामहल क्षेत्र के विधायक बालमुकुंदाचार्य और खेल एवं युवा मामलात विभाग के सचिव नीरज के पवन (आईएएस) ने किया। फेस्टिवल के दौरान 25 नन्हे मांगणियार बच्चों की ओर से प्रस्तुत म्यूजिकल सिम्फनी, ‘राहगीर’ का पोएटिक शो, ‘युग्म बैंड’ की धमाकेदार प्रस्तुति, और ‘हार्मनी ऑफ फॉक डांस’ ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही मान बैरागी की प्रस्तुति और कई अन्य सांस्कृतिक एवं पैनल चर्चाएं भी फेस्टिवल का हिस्सा रहीं। यह फेस्टिवल पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने वाले वनीकरण और मुफ्त ऑक्सीजन अभियान के लिए एक फंड रेजिंग पहल भी है। ‘नन्हे कलाकार’ का यह अनूठा प्रयास समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ सामूहिक प्रयासों का संदेश भी देता है। फेस्टिवल के दौरान प्रसिद्ध मांगणियार गायक जहूर खान के नेतृत्व में राजस्थानी कलाकारों की टोली ‘बाबांग’ ने अपने शानदार वाद्य और संगीत प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद स्थानीय लड़कियों द्वारा पारंपरिक राजस्थानी नृत्य ने माहौल को और जीवंत बना दिया। पैनल चर्चाओं में गूंजे विचार सत्र “सांस्कृतिक राजदूत के रूप में युवा” में डॉ. नीरज के पवन और अनिश शेखर ने युवाओं की संस्कृति और विरासत में भूमिका पर जोर दिया। “संस्कृत को पुनर्जीवित करना” सत्र ने इस प्राचीन भाषा की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसे आगे बढ़ाने के प्रयासों की वकालत की। राहगीर और आरजे कार्तिक ने कंटेंट क्रिएशन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए इस क्षेत्र में प्रामाणिकता और लचीलापन के महत्व पर चर्चा की। प्रतिष्ठित शेफ्स – अजीत कुमार सिंह, गगन जैन, गौरव माथुर, हिम्मत सिंह आदि ने परंपराओं को व्यंजनों के माध्यम से संरक्षित करने पर चर्चा की। कार्यक्रम का समापन शानदार संगीत संध्या के साथ हुआ। गायक राहगीर ने ‘तन खा गई ये तनख्वा’ और ‘मेरे गांव आओगे’ जैसे गीतों से समां बांध दिया। इसके बाद देवू खान मांगणियार और उनकी टीम ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। ‘युग्म बैंड’ के ‘मोरे पिया’, ‘लफ्ज और ‘सुनती है क्या’ जैसे गानों ने युवा दर्शकों का दिल जीत लिया।


