आधे से ज्यादा जिलों के अध्यक्षों का चुनाव जल्द:भाजपा का संगठनात्मक खाका बदला, अब पन्ना प्रमुख नहीं, बूथ कार्यकारिणी

भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया है। अब पन्ना प्रमुख के कॉन्सेप्ट से हटकर बूथ कार्यकारिणी पर वर्किंग कर ली है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर भाजपा ने बूथों की तैयारी 85 प्रतिशत से ज्यादा पूरी कर ली है। इसी ढांचा परिवर्तन के साथ जल्द ही प्रदेशभर में आधे से अधिक जिलाध्यक्षों का निर्वाचन होगा। इसके बाद औपचारिक रूप से ये अध्यक्ष प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव करेंगे। जिस तरह से वर्किंग की जा रही है, उसमें मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का ही चुनाव के जरिए चुना जाना तय माना जा रहा है। अभी वे इस प्रक्रिया में बूथ से जिलाध्यक्ष तक अपनी नई टीम तैयार कर रहे हैं। प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भले ही अभी चार साल बाकी हैं, लेकिन भाजपा अपनी ताकत को पूरे पांच साल सक्रियता से आगे बढ़ाना चाहती है। यही कारण है कि पार्टी ने प्रत्येक जिले में निर्वाचन अधिकारी लगा भी दिए हैं। अब बूथ अध्यक्ष, 11 पदाधिकारी-सदस्यों की टीम नए रूप में पन्ना प्रमुख के कॉन्सेप्ट के बजाय अब बूथ अध्यक्ष और 11 पदाधिकारी व सदस्यों की टीम बनाई जा रही है। इन 11 की टीम में एक महिला प्रमुख, एक सोशल मीडिया-वाट्सएप प्रमुख, एक बूथ मंत्री, एक लाभार्थी प्रमुख, एक मन की बात प्रमुख और 6 सदस्य। बूथ अध्यक्ष चुनेंगे मंडल अध्यक्ष, फिर प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव बूथ अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। मंडल अध्यक्ष जिला और फिर प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। आमतौर पर 50% तक मंडल और इतने ही जिलों की कार्यकारिणी बनने के बाद जिला और प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होगा। संगठनात्मक तैयारी देखें तो इतना काम हो चुका। संगठन के लिहाज से भाजपा के 44 जिले हैं। भाजपा के 1137 मंडल हैं। इस प्रक्रिया में आधे से अधिक जिलाध्यक्ष बदले जाने वाले हैं। जहां भाजपा के वोटर कम, वहां कार्यकारिणी में देरी असल में जहां कार्यकारिणी नहीं बनी, वहां आमतौर पर ऐसे वोटर्स बहुतायत में हैं, जो भाजपा के वोटर नहीं हैं। मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों के ज्यादातर बूथों पर कार्यकारिणी बनाए जाने का काम पूरा नहीं हो पाया है। इनके अलावा बड़े जिलों के शहरी चुनाव क्षेत्रों में भी अभी ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। छोटे जिलों में काम लगभग पूरा हो चुका है। दो से तीन जिलों में कुछ विवाद चलने के कारण उनके संगठनात्मक कार्य में देरी हो सकती है। …इसलिए पार्टी को बदलनी पड़ी अपनी रणनीति भाजपा सूत्रों के अनुसार पन्ना प्रमुख वाले कॉन्सेप्ट में 21 सदस्य होते हैं। बहुत से बूथों पर इनमें से कुछ सदस्य वहां खड़े होने वाले प्रत्याशियों या जाति के हिसाब से चुनाव के एन मौके पर शिफ्ट भी हो जाते रहे हैं। हालांकि इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन ऐसी स्थिति बनने से पूरा चुनावी मैनेजमेंट गड़बड़ा जाता है। अब पार्टी बूथ अध्यक्ष सहित केवल 12 लोगों पर ही मेहनत करेगी और अधिक परिणाम लेकर आएगी। 5.30 लाख पदाधिकारी तैयार भाजपा ने प्रदेश में मौजूदा करीब 52000 इलेक्शन बूथों में से 44 हजार से अधिक बूथ पर पदाधिकारी तय कर लिए हैं। इनमें एक अध्यक्ष के अलावा 11 अन्य पदाधिकारी व सदस्य। यानी करीब 5 लाख 30 हजार पदाधिकारियों का चुनाव कर लिया गया है। भाजपा संगठन के लिहाज से 44 जिलों में से 38 से अधिक जिलों के निर्वाचन अधिकारियों ने ऐसे बूथों के सभी पदाधिकारियों की सूची उनके नाम, फोन नंबर, पता और फोटो के साथ प्रदेश संगठन को सौंप दी है।

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