अंजुमन वोरसा-ए-फिरदौस ज़मानी बैगम के पदाधिकारियों ने सऊदी अरब में स्थित टोंक की बैगमों द्वारा बनाई गई रुबातों में निशुल्क ठहरने के लिए जारी इजाजत नामों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। कई वारिसों ने वक्फ करने वाली बैगमों की मंशा अनुसार एवं पारदर्शिता से इजाजतनामे जारी करने पर जोर दिया।
टोंक की बैगमों द्वारा बनाई गई रुबातों में ठहरने के लिए निशुल्क जारी इजाजत नामों में से टोंक स्टेट के परगनात के आजमीने हज को वंचित करना अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन वर्तमान जिम्मेदारों द्वारा इजाजत नामे वक्फ के अनुसार नहीं दिए जा रहे हैं। तंजीम के संरक्षक साहिबजादा मोहम्मद जमील खां, पदाधिकारी इबरत अली खां, इशरत अली खां, फाहद अली आदि ने बताया कि 100 साल पहले टोंक की बैगमों द्वारा सऊदी अरब के मक्का एवं मदीना में रुबातें बनाई गई थी। 2016 तक रुबातों में ठहरने के लिए टोंक स्टेट के परगनात को प्राथमिकता के साथ ही रियासत कालीन टोंक के करीबी लोगों को प्राथमितका देते हुए इजाजत नामे पारदर्शिता से दिए जाते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होना चिंताजनक है। सा. इबरत अली ने बताया कि 2016 तक उनके पिता सा. इस्मत अली खां द्वारा इजाजत नामे वितरित किए गए। उस समय आवेदन के लिए राज्य स्तर पर सूचना प्रसारित की जाती थी। टोंक स्टेट व परगनात के हज पर जाने वालों को इजाजत दिए जाने के बाद बची सीटों पर कुर्रा निकाला जाता था। जो सबके सामने टोंक में ही निकाला जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।
सा. इबरत अली खां एवं इशरत अली खां ने बताया कि उनके पिता द्वारा पूर्व में रुबातों के लिए इजाजत नामे वितरित किए जाते थे। उसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई। उनकी मांग है कि बैगमों ने जिस मंशा से रुबातें बनाई। उसके हिसाब से इजाजत नामे जारी हो। टोंक स्टेट के करीबी लोगों को प्राथमिकता से इजाजत नामे जारी किए जाए। उन्होंने उच्च अधिकारियों से गलत तरीके को रोके जाने के लिए कार्रवाई किए जाने पर भी जोर दिया।


