रीवा में नैक की टीम टीआरएस कॉलेज का निरीक्षण करने वाली है, जिसके आधार पर कॉलेज को ग्रेडिंग दी जाएगी। लेकिन निरीक्षण के पहले ही छात्र संगठन और कॉलेज प्रबंधन में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। छात्र संगठन का आरोप है की टीम के निरीक्षण के कुछ दिनों पहले कॉलेज को चमकाया जा रहा है जबकि साल भर कॉलेज की दुर्दशा कर दी गई। रीवा में रविवार को एनएसयूआई ने प्रेसवार्ता का आयोजन कर टी.आर.एस. कॉलेज और अवधेश प्रताप सिंह विद्यालय प्रबंधन पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप लगाए । जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में टीआरएस महाविद्यालय रीवा में नैक की टीम आने वाली है, जिसके चलते टीआरएस महाविद्यालय को ऐसे चमकाया जा रहा है। जैसे वहां किसी की बारात आने वाली हो । जब कॉलेज को ग्रेडिंग चाहिए होता है तब यहां सजावट होती है, 10 दिनों के अन्दर कॉलेज को पेंट पॉलिश कराकर चमका दिया गया है। जबकि पिछले 2 साल से महाविद्यालय में ना तो पीने का पानी सही से उपलब्ध हो पा रहा था और ना किसी बाथरुम में साफ-सफाई की जाती थी। अभी वर्तमान में महाविद्यालय की स्थिति कुछ कहने लायक नही थी, किसी भी खेल प्रतियोगिता के लिये टीआरएस महाविद्यालय को अन्य महाविद्यालयों से ग्राउंड लेना पड़ता था। यह सब ग्रेड लेने के लिए क्यों किया जाता है। टीआरएस महाविद्यालय रीवा में लगातार छात्र-छात्राओं को फेल अथवा प्रमोटेड, ए.टी.के.टी. किया जाता है, उसके बाद छात्र फीस जमा करके परीक्षा देते हैं। फिर भी उसे उसी विषय पर फेल ए.टी.के.टी. कर दिया जाता है। टीआरएस महाविद्यालय रीवा के अन्दर क्लासों में पंखे नहीं चल रहे हैं और बेंच की सफाई नहीं है। बीबीए डिपार्टमेंट की क्लासेस पिछले 1.5 माह से संचालित नहीं की जा रही हैं इसलिए ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध की जानी चाहिए। टीआरएस कॉलेज के अन्दर सभी विद्यार्थियों को आई कार्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि बाहरी व्यक्ति और कॉलेज के छात्र-छात्राओं की पहचान हो सके, क्योंकि महाविद्यालय के अन्दर असामाजिक तत्व घुस जाते हैं और छात्रों के साथ मारपीट करते हैं। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा द्वारा लगातार जो परीक्षा परिणाम घोषित किए जाते हैं,उनमें 80 प्रतिशत से ज्यादातर छात्र-छात्राओं को फेल या प्रमोटेड किया जाता है। अभी बीएससी फाइनल ईयर और बीएससी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम हाल ही मे घोषित किए गए हैं, छात्र-छात्राओं को लगातार फेल प्रमोटेड किया गया। जब एन.एस.यू.आई. ने महाविद्यालय में आंदोलन किया तो विश्वविद्यालय द्वारा कहा गया कि एजेंसी की गलती के कारण यह हुआ है और परिणाम पेंडिंग में डाल दिया गया। एक हफ्ते बाद फिर पहले की तरह ही परीक्षा घोषित कर दिया गया। इस तरह का कृत्य अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में हमेशा से होता चला आ रहा है। रिजल्ट सुधरवाने के नाम पर छात्र-छात्राओं से मोटी रकम वसूली जाती है, इससे यह स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय रीवा का पूरा प्रबंधन इस पर अपना हिस्सा बनाकर काम करता है। उधर टीआरएस और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पूरे मामले में छात्र संगठन के आरोपों को गलत बताया है, जिनका कहना है कि छात्र-छात्राओं की सभी समस्याओं पर पूरा ध्यान दिया जाता है। किसी से पैसे की डिमांड नहीं की जाती।


