छिंदवाड़ा के कोलांचल क्षेत्र के लिए अच्छी खबर है। कोल इंडिया की सहायक कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने भारत ओपनकास्ट और मोहन कालरी मोआरी खदानों के लिए वन क्षतिपूर्ति मद की राशि स्वीकृत कर दी है। यह राशि मंजूर होने के बाद अब दोनों खदानों को शुरू करने के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। सांसद बंटी विवेक साहू के प्रयासों से यह सफलता मिली है। सांसद बंटी विवेक साहू ने कुछ दिन पहले केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था कि दोनों खदानों की अनुमति केवल प्रक्रियागत कारणों से अटकी हुई है। इसके बाद सांसद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और वन विभाग के मुख्य सचिव से भी व्यक्तिगत स्तर पर अनुरोध किया था। वन विभाग को मिलेंगे करीब 19.5 करोड़ रुपए
वन विभाग की दो बड़ी वित्तीय मांगें थीं, जिन्हें अब WCL ने मंजूरी दे दी है। धनराशि जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। NOC मिलते ही शुरू होगी खनन प्रक्रिया
जैसे ही वन विभाग को यह राशि प्राप्त होगी, दोनों खदानों के लिए एनओसी जारी कर दी जाएगी। एनओसी मिलते ही खदानों को शुरू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बनेंगे, औद्योगिक विकास होगा और कोयला उत्पादन को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। पीएम और मंत्री का जताया आभार
सांसद बंटी विवेक साहू ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी का आभार व्यक्त किया है। स्थानीय स्तर पर इसे कोलांचल क्षेत्र के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


