लोकसभा में उठा चंडीगढ़ से संबंधित मुद्दा:सांसद मनीष तिवारी ने मालिकाना हक देने की उठाई मांग, बोले-ठोस समाधान निकाला जाए

चंडीगढ़ के पांच अहम और वर्षों से लंबित पड़े मुद्दों को आज लोकसभा में जोरदार तरीके से उठाया गया। सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि ये मुद्दे सीधे शहरवासियों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़े हुए हैं, इसलिए केंद्र सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। लोकसभा में उठाए गए मुख्य 5 मुद्दे सांसद ने गृहमंत्री से आग्रह किया कि 12 दिसंबर 2025 को गृह मंत्रालय में प्रस्तावित बैठक में इन सभी मुद्दों का ठोस समाधान निकाला जाए, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके। चंडीगढ़ शहर को बसाने के लिए भवन निर्माण के दौरान बहुत से मजदूर और कारीगर दूसरे राज्यों से यहां आए थे, जो बाद में यही पर झुग्गी-झोपड़ियों की कॉलोनी बनाकर रहने लगे। इन कॉलोनियों में कच्चे-पक्के मकान बने हुए थे। इन लोगों को बाद में पुनर्वास स्कीम के तहत फ्लैट्स बनाकर दिए गए थे। जिन्हें लीज या किराए पर दिया गया। इसके अलावा इन घरों के लिए अलग-अलग बैंकों से लोन करवाए गए थे। अब बहुत से लोगों ने लोन उतार दिए हैं और वह अपना मालिकाना हक मांग रहे हैं। इसमें कुछ कालोनियों की अलाटमेंट 2020- 22 में पूरी हो चुकी है। चंडीगढ़ में ऐसी 18 कॉलोनियां बनी हुई हैं, जिसमें 13500 मकानों की मलकियत को लेकर रौला है।
अब इस मामले में एक कमेटी का गठन किया गया, जिसकी तरफ से लोगों को किस तरह की राहत दी जाए, इसकी रिपोर्ट बनाई जा रही है। जिसमें अब भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। लोगों को डर है कि ये घर उनके नाम नहीं किए जाएंगे या जरनल पावर आफ अटार्नी (GPA) पर बेचे गए मकानों की मलकियत उन्हें नहीं दी जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन के 9 फरवरी 2023 को नोटीफिकेशन जारी किया गया था। प्रशासन ने पिछले साल शेयर-वाइज प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर किसी भी प्रॉपर्टी के हिस्से यानी शेयर की अलग-अलग रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। अब केवल पूरी प्रॉपर्टी की एकमुश्त बिक्री ही मान्य है।
शहर में बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी ऐसी हैं जो साझेदारी में बंटी हुई हैं। लोग अपने हिस्से की रजिस्ट्री कर बेचते रहे हैं। प्रतिबंध के बाद न तो मालिक अपना शेयर बेच पा रहे हैं और न ही खरीदार खरीद पा रहे हैं। इससे रियल एस्टेट बाजार ठप पड़ गया है और कई परिवार कानूनी दिक्कतों में फंस गए हैं। चंडीगढ़ के 22 गांवों से लाल डोरा हटाने का मामला एक बार फिर प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लाल डोरा बने रहने के कारण उनके घरों और जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही, जिससे मालिकाना हक अधर में लटका हुआ है। न तो बैंक लोन मिल पा रहा है और न ही निर्माण व विकास कार्य सुचारू रूप से हो पा रहे हैं।
लाल डोरा हटने के बाद गांवों की प्रॉपर्टी नियमित हो जाएगी और प्रशासन मास्टर प्लान के मुताबिक विकास कार्य शुरू कर सकेगा। जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाए, ताकि ग्रामीणों को रजिस्ट्री और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान जल्द मिल सके। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में वर्षों से चली आ रही ‘नीड-बेस्ड चेंजेज’ के कारण लोग परेशान हैं। फ्लैट मालिकों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक किए गए छोटे-छोटे निर्माण और एक्सटेंशन अभी तक प्रशासन द्वारा नियमित नहीं किए गए, जिसके कारण रजिस्ट्री, ट्रांसफर और निर्माण संबंधी कार्य अटक रहे हैं। कई बार मांग उठ चुकी है कि इन बदलावों को सुरक्षित श्रेणी में रखकर जल्द से जल्द रेगुलराइज किया जाए, ताकि हजारों परिवार राहत पा सकें। चंडीगढ़ की कई को-ऑपरेटिव और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लंबित मामलों को लेकर सदस्यों में नाराजगी है, वह रजिस्ट्री बंद होने, ऑडिट-प्लानिंग अनुमतियों की देरी, कानूनी विवाद और प्रशासनिक फाइलों के अटकने से लोग वर्षों से मालिकाना हक नहीं पा रहे। काफी समय से मांग उठती आ रही है कि लंबित फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की जाए और जिन सोसाइटियों का रिकॉर्ड सही है, वहां तुरंत रजिस्ट्री बहाल की जाए।

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