राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बैतूल जिले में ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है जिनके कोहनी के नीचे हाथ नहीं हैं। इन बच्चों को आर्टिफिशियल हाथ लगाए जाएंगे। इस पहल के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली के एक फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रोग्राम मैनेजर योगेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में अब तक 47 बच्चों की पहचान की जा चुकी है। चिन्हांकन का यह कार्य अगले 4 दिनों तक जारी रहेगा। इस कार्यक्रम में 15 वर्ष से अधिक उम्र के वे बच्चे शामिल होंगे, जिनके हाथ जन्मजात रूप से या किसी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्हें निःशुल्क आर्टिफिशियल हाथ प्रदान किए जाएंगे। गांवों में किया जा रहा सर्वे इस पहल के तहत गांवों में सर्वे किया जा रहा है। विकासखंड स्तर पर बीएमओ और डीपीएम की टीमें पात्र बच्चों की सूची तैयार कर रही हैं। योगेंद्र कुमार ने बताया कि चिन्हांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक मेगा कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस कैंप में इनाली फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम बच्चों को उपयुक्त कृत्रिम हाथ लगाएगी। फाउंडेशन की टीम प्रत्येक बच्चे की शारीरिक स्थिति का आकलन कर यह तय करेगी कि उसे किस प्रकार और किस आकार का कृत्रिम हाथ लगाया जाना चाहिए। बैतूल के अलावा इंदौर, भोपाल, सागर और रीवा जिले भी इस कार्यक्रम में शामिल हैं।


