श्योपुर में नेशनल हाईवे 552 के निर्माण के लिए जिले के जंगल के हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसके लिए वन विभाग से परमिशन भी ली गई है। लेकिन, पेड़ कटाई करने वाले ठेकेदार काटे गए पेड़ों की बेशकीमती लकड़ी को वन विभाग डिपो में जमा कराने के अलावा इसकी तस्करी की जा रही है। तस्करी करके इसे ईट भट्टे चिमनी और फर्नीचर बनाने का काम करने वाले लोगों को बेच रहे हैं। वन विभाग की लड़की ठेकेदार बाजार में बेच रहा असल में जंगल से लकड़ी काटने के बाद उसे ईको सेंटर के पास स्थित वन विभाग की डिपो में रखवाया जान चाहिए था। लेकिन, लकड़ी की तस्करी करने वाले लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को वन डिपो लेकर जाते दिखे। जबकि, ज्यादातर वन डिपो न जाकर शहर की ओर निकल जाते हैं। फिर लकड़ी तस्कर ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहित लकड़ी का धर्मकांटे पर वजन करवाकर उसे को ईट भट्टे चिमनी और दूसरी जगह पर मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। शासन की संपदा का दुरूपयोग शनिवार शाम और रविवार की सुबह लकड़ी की तस्करी होते हुए पाई गई। ठेकेदार को जंगल के पेड़ काटने की अनुमति मिलने की वजह से जंगल तस्कर खुलेआम न सिर्फ विशाल हरे भरे पेड़ों को काट रहे हैं। बल्कि, लकड़ी की तस्करी करके लाखों रुपए कमा रहे हैं और शासन को लाखों रुपए की चपत भी लगा रहे हैं। क्योंकि,काटी गई लकड़ी को बेचने के लिए वन विभाग आगामी 20 से 25 जनवरी को नीलामी करेगा। लेकिन, लकड़ी तस्कर नीलामी से पहले ही दूसरे रास्ते से लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। ऐसे हो रही तस्करी श्योपुर से गौरस, श्यामपुर तक एनएच 552 का निर्माण किया जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए पुरानी सड़क के दोनों ओर करीब 4-4 मीटर दूरी तक के पेड़ों को काटा जा रहा है। इसकी अनुमति वन विभाग से सड़क निर्माण कराने वाली एजेंसी को दी गई है। लेकिन, सड़क ठेकेदार ने ऐसे लोगों से पेड़ों की कटाई कराई जा रही है, जो पेड़ काटने के बाद आधे से ज्यादा लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि, लकड़ी तस्कर आधे से ज्यादा लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। वह लकड़ी को वन डिपो ले जाने के नाम पर मौके से ट्रैक्टर ट्रॉली में लेकर जाते जरूर हैं। लेकिन, वन डिपो आधी लकड़ी भी नहीं पहुंचती बल्कि, जंगल के रास्ते भगवाज होकर उनके लकड़ी से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली निकल जाते है। फिर ईदगाह रोड़ से होते हुए बायपास, पाली रोड़ से जाटखेड़ा के एक निजी धर्मकांटे पर उसका वजन कराया जाता है। फिर लकड़ी को मोटे दाम पर ईंट भट्टे चिमनी या फर्नीचर का काम करने वाले लोगों को बेच दिया जाता है। ऐसा करते हुए दो ट्रैक्टर-ट्रॉली कैमरे में भी रिकार्ड हुए हैं। वीडियो बनाते समय लकड़ी तस्कर मीडिया कर्मियों से झगड़ा करने पर उतारू तक हो गए। जिम्मेदार बोले- मेरी जानकारी में नहीं वन विभाग के डीएफओ के एस रांधा का कहना है कि हाईवे निर्माण के लिए दोनों ओर से काटी जा रही लकड़ी को वन डिपो में रखवाया जा रहा है। उसकी नीलामी होने के बाद लकड़ी को संबंधित खरीदार ले जा सकता है। अगर कोई तस्करी कर रहा है, तो मेरी जानकारी में नहीं है।


