विदिशा में विकास कार्य ठप होने और नगर पालिका प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर 21 दिनों से धरने पर बैठे पार्षदों और पार्षद प्रतिनिधियों का आक्रोश आज फूट पड़ा। उन्होंने माधवगंज चौराहे से लोहा बाजार होते हुए बड़ा बाजार तक ‘विकास कार्यों की अर्थी’ निकाली और नगर पालिका प्रशासन का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। पार्षदों का कहना है कि 12 नवंबर से उनका धरना लगातार जारी है, लेकिन न तो नगर पालिका अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधि उनकी सुनवाई कर रहे हैं। शहर में सड़क, नालियों, सफाई व्यवस्था और अन्य विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। पार्षद प्रतिनिधि जमुना कुशवाहा ने कहा कि विदिशा का विकास थम गया है। प्रशासनिक अधिकारियों और नगर पालिका कर्मचारियों ने शहर को बदहाल कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन सरकार को यह संदेश देने के लिए है कि अब हालात बेहद खराब हो चुके हैं और जरूरत पड़ने पर वे भोपाल और दिल्ली तक जाएंगे। पार्षद प्रतिनिधि धर्मेंद्र सक्सेना ने कहा कि शहर में भ्रष्टाचार चरम पर है, सड़कें बदहाल हैं और विकास कार्य बंद पड़े हैं। इसी विरोध में आज विकास की अर्थी निकाली गई और नगर पालिका के भ्रष्ट अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का पुतला दहन किया गया। हमारे मांग पत्र को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। पार्षदों ने बताया कि वे लगातार जनता से समर्थन पत्र भरवा रहे हैं और उन्हें व्यापारिक, सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों का साथ मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विकास कार्यों को पुनः शुरू करने और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। शहर में पहली बार इस तरह का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है, जिसने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


