कांग्रेस ने जलाई बृजमोहन अग्रवाल की चिट्ठी की प्रतियां:विपक्ष का वार-अगर सच में जनता की चिंता है तो चिट्ठी नहीं, सड़क पर उतरें सांसद

जमीन गाइडलाइन बढ़ोतरी को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा सरकार को लिखी चिट्ठी का कांग्रेस ने चिट्ठी की प्रतियां सार्वजनिक रूप से जलाकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि बृजमोहन केवल पत्र राजनीति कर रहे हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि जनता को बहलाने के लिए पत्र लिखकर ढोंग और पाखंड करना बृजमोहन जी की पुरानी आदत है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने तीखा बयान देते हुए कहा कि यदि बृजमोहन को वाकई जनता की चिंता है, तो उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, जन-आंदोलन लगातार चल रहा है। यदि बृजमोहन जनता के हित में ईमानदार हैं तो किसानों और व्यापारियों के साथ धरना दें, हम भी उनका साथ देंगे। चिट्ठी लिखना सिर्फ खानापूर्ति है। प्रदर्शन के दौरान शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन, पप्पू बंजारे, प्रमोद दुबे, गिरीश दुबे, आकाश तिवारी सहित कई नेता मौजूद रहे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में “सुशासन” के नाम पर कुशासन चल रहा है और नई जमीन गाइडलाइन ने लोगों के सामने भारी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कांग्रेस का आरोप- भाजपा नेताओं की चिट्ठियां सिर्फ दिखावा कांग्रेस ने पुराने उदाहरण गिनाते हुए आरोप लगाया कि बृजमोहन अग्रवाल की चिट्ठियां केवल औपचारिकता होती हैं। पार्टी ने कहा कि उन्होंने पहले भी कुम्हारी टोल प्लाज़ा हटाने की मांग, CBCE क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना, अपराध और कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री को पत्र, साइबर क्राइम और ट्रैफिक के लिए पुलिस भर्ती, लोकल ट्रेन के लिए रेलवे मंत्री को आवेदन, ओपन हार्ट सर्जरी शुरू करने की मांग, अनुकंपा नियुक्तियों का मामला जैसे कई मुद्दों पर चिट्ठियां लिखीं। कांग्रेस का कहना है कि इनमें से किसी पर उन्होंने सड़क पर उतरकर आंदोलन नहीं किया। इसलिए यह भी महज नौटंकी है। उनका आरोप है कि डबल इंजन सरकार में नेता अपनी ही सरकार के आदेशों पर विरोध का नाटक कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। बृजमोहन अग्रवाल की चिट्ठी में क्या लिखा था किसानों और कारोबारियों के विरोध के बीच भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा था। उनका कहना है कि- उन्होंने मांग की है कि नई गाइडलाइन को तत्काल स्थगित कर पुरानी गाइडलाइन फिर से लागू की जाए।

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