भोपाल मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) का ग्रीन सिग्नल मिल गया है। तीन बार निरीक्षण करने के बाद सीएमआरएस ने अपनी एनओसी यानी, ‘ओके’ रिपोर्ट दे दी है। ऐसे में दिसंबर में ही प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का कमर्शियल रन हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। 13 दिसंबर को लोकार्पण कराए जाने को लेकर भी मंथन किया जा रहा है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट में सब कुछ ‘ओके’ होने के बाद यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को दी गई है। वहीं, नई दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकार्पण करेंगे। वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। इंदौर में 31 मई को उन्होंने वर्चुअली तरीके से लोकार्पण किया था। एक संभावना यह भी है कि भोपाल में भी मेट्रो का वर्चुअली तरीके से लोकार्पण हो, लेकिन मेट्रो अफसर फिलहाल इसे लेकर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। खास बात ये है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के दौरान टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होते हुए मैन्युवली रहेगा। टिकट कलेक्शन करने वाली तुर्किए की कंपनी का ठेका मेट्रो कॉरपोरेशन कैंसिल कर चुका है। नई एजेंसी आने तक मैन्युवली टिकट कलेक्शन सिस्टम रहेगा। इंदौर में भी यही सिस्टम लागू है। तीन बार निरीक्षण कर चुकी सीएमआरएस
सीएमआरएस 12 नवंबर को भोपाल पहुंची थी। अगले 3 दिन यानी, 13, 14 और 15 नवंबर को टीम ने डिपो से लेकर ट्रैक और ट्रेन तक निरीक्षण किया था। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता के साथ टीम ने मेट्रो के नट-बोल्ड तक देखे थे। इसके बाद टीम वापस लौट गई। इससे पहले दो बार टीम भोपाल आ चुकी है। आखिरी निरीक्षण के बाद रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा था, जो अब मिल गई है। मेट्रो अफसरों का कहना है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए वे सभी काम पूरे हो चुके हैं, जो जरूरी है और सीएमआरएस के पैमाने के हैं। स्टेशनों का कुछ काम जरूर बचा है, लेकिन उससे कमर्शियल रन पर असर नहीं पड़ेगा। CMRS की मंजूरी के बाद ये प्रक्रिया प्रायोरिटी कॉरिडोर के बाद आगे यह
सुभाषनगर से एम्स तक प्रायोरिटी कॉरिडोर है। इसमें कुल 8 स्टेशन बने हैं। यहां पर कमर्शियल रन पूरा होने के बाद पूरा फोकस ऑरेंज लाइन के दूसरे फेज के हिस्से सुभाषनगर से करोंद तक रहेगा। वहीं, ब्ल्यू लाइन भदभदा से रत्नागिरी के बीच का काम भी तेजी से निपटाया जाएगा। सीएमआरएस के आखिरी दौरे में यह रहा सीएमआरएस ने यह की जांच की इनका भी बारीकी से निरीक्षण
सभी स्टेशनों पर फायर सेफ्टी सिस्टम पर खास फोकस रहा। वहीं, लिफ्ट, एस्कलेटर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम आदि को लेकर भी बारीकी से निरीक्षण किया। डिपो में कंट्रोल रूम से ट्रेनों के आने-जाने, सिग्नल आदि पर नजर रखी। क्या है CMRS की भूमिका?
सीएमआरएस किसी भी मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए सुरक्षा की अंतिम स्वीकृति देते हैं। उनकी रिपोर्ट के बाद ही मेट्रो पर यात्रियों का संचालन शुरू किया जा सकता है। इन पहले अक्टूबर में था टारगेट, अब नवंबर-दिसंबर में उम्मीद
बता दें कि इससे पहले सरकार ने अक्टूबर में भोपाल में मेट्रो दौड़ने का टारगेट रखा था। इसलिए सितंबर और अक्टूबर में सीएमआरएस के दो अहम दौरे भी हो चुके थे। पूर्व मेट्रो कमिश्नर जनक गर्ग ने टीम के साथ सुभाष नगर स्थित मेट्रो डिपो और प्रायोरिटी कॉरिडोर के 6.22 किलोमीटर रूट को देखा था। वे ट्रेन में सवार हुए थे। अब आखिरी दौरा भी हो चुका है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब उम्मीद है कि जल्द ही मेट्रो आम लोगों के लिए ट्रैक पर दौड़ने लगेगी। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम
भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है। इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशन के कुछ काम बाकी हैं, जो पूरे किए जा रहे हैं। रेल ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल
राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।


