मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जंयत पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज बाबूजी हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी विरासत हमारे साथ है। बाबूजी कभी जिस बेसिक शिक्षा के स्कूल में पढ़े थे, आज उनका ग्रांड सन उस विभाग के मंत्री के रूप में शिक्षा को नई दिशा दे रहा है। यही है पूर्वजों की तपस्या यही है। साधना का फल, वह फलीभूत होगा। यदि सही दिशा में उसके लिए प्रयास किया गया है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा संतोष, साक्षी महाराज, पूर्व सांसद राजबीर सिंह, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे। सीएम ने कहा कि आज ही के दिन अलीगढ़ के एक गांव के सामान्य किसान परिवार में बाबूजी का जन्म हुआ था। बालक कल्याण सिंह ने उस समय आरएसएस की सामान्य शाखा से लेकर आगे के कार्यक्रम के माध्यम से अपने आप को राष्ट्र भक्ति के जिस सांचे में ढाला था। एक किसान, एक शिक्षक के रूप में 1977 में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, विधायक, सांसद और दो बार प्रदेश के सीएम के रूप में उनकी कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता की दक्षता को हर एक व्यक्ति ने स्वीकार किया। सीएम ने कहा कि अक्सर होता है कि लोग सत्ता के लिए सिद्धांत को तिलांजलि देते हैं। कुछ प्राप्त करने के लिए मूल्यों के साथ समझौता करते हैं। लेकिन एक ऐसा व्यक्तित्व भी था, जिसने मूल्य और सिद्धांत के साथ समझौता नहीं किया। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान और उसके बाद भी प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा देने, प्रशासनिक दक्षता को परिपूर्ण करने के लिए 1990 के दशक के प्रारंभ में जो प्रयास शुरू किए गए थे। वह एक नए यूपी का दर्शन कराता है। योगी ने कहा कि 1947 में देश आजाद होता है, लेकिन सुशासन क्या होता है? यह यूपी के वासी नहीं देख पाए, इसका पहली बार अहसास तब हुआ जब प्रदेश में कल्याण सिंह पहली बार सीएम बने थे। याद कीजिए उस समय भी उन्हें अस्थिर करने के लिए झुंड के झुंड भी अव्यवस्था फैलाने के लिए उतारू हो गए थे। लेकिन उस समय भी उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सरकार को तिलांजलि दी। आज वह सपना साकार हुआ है, बाबूजी की आत्मा को शांति मिली होगी। सीएम ने कहा कि यही है दूरदृष्टि, जो सपना देखा था वह साकार हो गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को उन्होंने आरएसएस की पाठशाला में सीखा था, उसे जमीनी धरातल पर उतारने का काम किया। नकलविहीन परीक्षा के लिए चलाया गया अभियान, शासन की सुचिता और पारदर्शिता भी अनुकरणीय है। याद कीजिए की 21 अगस्त 2021 को वह हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका मार्गदर्शन आज भी शासन प्रशासन के लिए पाथेय बनाय हुआ है। जब भी सुचिता की बात होती है तो कल्याण सिंह का नाम श्रद्धा एवं सम्मान से यूपी का हर व्यक्ति लेता है।


