अवैध कोयले के वैध भट्ठे, ईंटों को पकाने के लिए कोयला आखिर कहां से आता है ? गरीब मजदूर कोयला उतारने डाल रहे जोखिम में जान

अवैध कोयले के वैध भट्ठे, ईंटों को पकाने के लिए कोयला आखिर कहां से आता है ?
गरीब मजदूर कोयला उतारने डाल रहे जोखिम में जान
(विकास पांडे)
अनूपपुर।
दैनिक आर्यावर्त पर खबर प्रकाशित होने के स्पेशल क्राइम ब्रांच रेलवे सक्रिय हुई। बीते तीन दिनों से स्पेशल क्राइम ब्रांच रेलवे की टीम निरंतर बिजुरी में कोयला चोरों को पकड़ने कोशिश कर रही है उधर दूसरी ओर सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार आरपीएफ ने भी तीन कोयला चोरों को पकड़ कर मुकदमा दर्ज किया है।
कैबिन टोला के पास कोयले का ढे़र
कैबिन टोला से कुछ ही दूरी पर खेत में रेलवे की बैंगनों से कोयला उतार कर ढेर बना रखा गया है। ईंटों को पकाने कोयला ईंट भट्ठों में आखिर कहा से पहुंच रहा है इस सवाल का उत्तर तलाषना हो तो बिजुरी नगर के ईट भट्ठों की तस्वीर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। किसी के भी जहन में यह सवाल सहज ही उठेगा कि ईंटों के निर्माण में जुटे भट्ठे द्रुत गति से जारी है बताया जाता है कि पंडरी पानी गांव के पीछे बंद क्रेशरो के आसपास बहुतायत मात्रा में ईंटों के भट्ठों में ईंटों का निर्माण किया जा रहा है इसके ठीक समानांतर शीतलधारा कोयला खदान के ठीक बगल में बिजुरी कोरजा मुख्य मार्ग पर संत जोसेफ स्कूल के पास और कुराज गांव के अगल बगल ईंटों को बनाने की तस्वीरें दिखाई देती है। ऐसे में एक बड़ा सवाल इसके भीतर से निकल कर सामने आता है कि उक्त ईंटों को पकाने के लिए कोयला आखिर कहा से उपलब्ध होता है ? क्या ईंट के ठेकेदारों द्वारा दस्तावेज युक्त एक नंबर का कोयला खरीदा जाता है या फिर कोयला खदानों और रेलवे की बैंगनों के आसरे कोयला उपलब्ध हो जाता है ?
रेलवे बैगनो से उतारा जाता है कोयला
उल्लेखनीय है कि उक्त कच्ची ईंटों को पकाने के लिए कोयले की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है ऐसे में दावों का सच अपनी जगह लेकिन हमारे सूत्र इस बात का दाबा करते हैं कि ईंट भट्ठों के ठेकेदारों द्वारा गरीब तबके के मजदूरों को जान जोखिम में डालकर रेलवे की बैंगनों से कोयला उतरवाया जा रहा है मिली जानकारी अनुसार बिजुरी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 38 से 40 रैक कोयले से भरी गाडियां जाती है उसका पूरा फायदा ईंट भट्ठों के ठेकेदारों द्वारा उठाया जा रहा है जाहिर है रेलवे की बैंगनों के ठीक ऊपर ओ एच ई का खतरा मंडराता रहता है याद कीजिए  कि बिजुरी नगर में बीते लगभग 5 वर्ष पूर्व रेलवे बैगन से कोयला उतारते वक्त एक गरीब मजदूर की करेंट की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई थी लेकिन इससे भला ईटा ठेकेदारों को क्या लेना-देना उन्हें तो कोयला चाहिए जिससे वो ईंट पकाकर मोटा मुनाफा कमा सकें।
क्या आरपीएफ की मिली भगत ?
आरपीएफ के आला अधिकारी ईंट भट्ठों में जा कर इस बात की पड़ताल क्यों नहीं करते कि कोयला कहा से आ रहा है रेल स्टेशन के पास  खास तौर पर कैबिन टोला और गल्लैय टोला के समीप में रात के अंधेरे में आर पी एफ टीम सघन चेकिंग अभियान  कोयला चोरी रोकने के इर्द-गिर्द क्यों नहीं चलाती ये वो सवाल है जिसका जबाब तो आर पी एफ के अधिकारीयों के पास ही होगा जबकि सूत्र इस बात का दाबा करते हैं कि बैंगनों से कोयला उतारा जा रहा है और समझने की कोशिश कीजिए कि कैबिन टोला स्थित रेलवे पटरियों से कुछ ही दूरी पर खेतों में पड़े कोयले के छोटे-छोटे ढेर और कोयला के काले काले कयी निशाना इस बात की पुष्टि भी करते हैं बताया गया है कि दैनिक आर्यावर्त पर खबर प्रकाशित होने की अगली सुबह आर पी एफ का अमला कुछ भट्ठों पर गया भी और ईंट भट्ठों पर मिले ठेकेदारों से रेलवे बैंगनों के कोयले को न खरीदने की सख्त हिदायत देकर और केस बनाने की बात कह कर लौट आया यहां पर एक बड़ा सवाल बार बार हमारे जहन में उठता है आपके जहन में भी उक्त सवाल उठना चाहिए कि आर पी एफ अमला खड़ी बैंगनों के आसपास कोयला चोरी रोकने के लिए रात के अंधेरे में अपने सुरक्षा बलों की डियुटी क्यों नहीं लगाता जाहिर है अगर रेल सुरक्षा बल का दल रेलवे बैंगनों के आसपास कोयले की सुरक्षा के मद्देनजर व्यवस्था चाक-चैबंद कर दें तो फिर कोयले की चोरी भला कैसे संभव होगी ?
आरपीएफ के अधिकारियों के बयान अलग अलग
हालांकि रेल सूत्र से मिली जानकारी अनुसार दैनिक आर्यावर्त पर खबर प्रकाशित होने के दूसरे दिन से ही रेलवे स्पेशल क्राइम ब्रांच द्वारा कोयला चोरों को पकड़ने के लिए बिजुरी में अभियान चलाया है आर्यावर्त से चर्चा के दौरान स्पेशल क्राइम ब्रांच अनूपपुर में पदस्थ मुख्य अधिकारी बी आर सिंह ने बताया कि आर पी यफ मनेन्द्रगढ द्वारा कोयला चोरी के तीन केस बनाए गए हैं जबकि इस संबंध मनेन्द्रगढ आर पी एफ के प्रभारी अधिकारी अर्जुन सिह ने ऐसी किसी भी कार्रवाई से साफ इंकार किया है उक्त दोनों ही अधिकारियों द्वारा अलग-अलग तरह की जानकारी अपने आप में सवाल खड़े करता है माजरा क्या है।

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