भास्कर न्यूज | अमृतसर 27 दिसंबर को प्रस्तावित साहिबजादा शहादत दिवस को केंद्र और पंजाब की ओर वीर बाल दिवस के तौर पर मनाने के फैसले को लेकर विवाद छिड़ गया है। एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने भी सरकार को छोटे साहिबजादों की शहादत को वीर बाल दिवस के रूप में न मनाने की चेतावनी दी है। धामी ने पंजाब सरकार द्वारा 12 दिसंबर को लुधियाना में राज्य स्तरीय ‘वीर बाल दिवस’ पर एतराज जताते हुए इसे सिख सिद्धांतों और परंपराओं के खिलाफ बताया है। धामी छोटे साहिबजादों की शहादत को बच्चों के ग्रुप से जोड़कर वीर बाल दिवस तक सीमित करना शहादत की भावना और सिख परंपराओं के खिलाफ है। ‘वीर बाल दिवस’ प्रोग्राम के तहत फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के नाम पर स्कूलों में माता गुजरी जी, युवा साहिबज़ादों और शहीद सिंहों की ड्रेस पहनकर कॉम्पिटिशन करवाने का चलन सिख नैतिकता के खिलाफ है। धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्म मुताबिक वीर बाल दिवस को लेकर नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार को पहले ही लिखा जा चुका है, लेकिन आज तक इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। वहीं श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इंडियन चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल से जुड़ी चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल, पंजाब द्वारा साहिबज़ादों के शहीदी दिवस को समर्पित राज्य स्तरीय आपत्तिजनक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का कड़ा नोटिस लिया है और उन्हें इसे तुरंत रद्द करने को कहा है। जत्थेदार ने साफ किया कि केंद्र सरकार का दिया गया “वीर बल दिवस” नाम श्री अकाल तख्त साहिब को मंजूर नहीं है, इसलिए देश या दुनिया में कोई भी गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी, सिख संस्था या संगठन इस नाम से कोई समारोह न करे बल्कि “साहिबजादा शहादत दिवस” नाम का इस्तेमाल करे।


