राजन गोसाईं | अमृतसर/मजीठा अमृतसर-पठानकोट मुख्य मार्ग पर गांव खुशीपुर के पास बस-टिप्पर की टक्कर में बच्चे की मौत हो गई जबकि 15 घायल हो गए। 15 घायलों में से 7 गंभीर घायलों को राहगीरों ने अपनी कारों में अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई। अगर यह लोग हिम्मत न दिखाते तो मरने वालों की गिनती 8 से ज्यादा पहुंच सकती थी। मृतक की पहचान अमृतसर कैंट के रहने वाले 15 वर्षीय साहिब सिंह के रूप हुई है। हादसे के बाद आम लोग मसीहा बन कर पहुंचे। राहगीरों ने घायलों को अपनी कारों में अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल और मेहता रोड स्थित श्री गुरु रामदास अस्पताल पहुंचाया। तरनतारन जा रहे परमिंदर सिंह ने बताया कि हादसे के करीब एक से दो मिनट बाद जब जाम लगा देखकर वह घटनास्थल पर पहुंचे तो लोग बस में फंसे यात्रियों को निकाल रहे थे। वह तरनतारन जा रहे थे, रात हो चुकी थी। आगे रास्ता लंबा था, मगर उन्होंने इंसानियत के नाते अपने आगे के सफर की चिंता छोड़कर घायलों की मदद करना अपना धर्म समझा। वह 2 घायलों को अपनी कार में लेकर जीएनडीएच पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बुधवार शाम करीब पौने 7 बजे एचएस प्रीमिक्स कंपनी का टिप्पर (पीबी02-बीवी-9092) अपने डंप की ओर यू-टर्न लेने लगा। इसी दौरान पठानकोट से अमृतसर आ रही एबीटीसी कंपनी की तेज रफ्तार बस (पीबी02-सीसी-6780) की पीछे से टिप्पर में भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह टूट गया। अमृतसर के ही जुगराज सिंह भी अपनी कार में एक महिला और एक अन्य घायल को अस्पताल में लेकर आए। जुगराज सिंह ने बताया कि हादसे के बाद जब वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ था। हर कोई मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा था। पुलिस मुलाजिम भी गाड़ियों को रोक कर घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अपील कर रहे थे। उन्होंने तुरंत अपनी कार में घायलों को बैठाया और उन्हें लेकर यहां पहुंचे। अमृतसर के एडवोकेट हरजीत सिंह ने बताया कि बटाला कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। जिस समय हादसा हुआ तो जाम में फंस गए। लेकिन आगे आकर जब घायलों की स्थिति देखी, तो तुरंत अपनी कार में बैठाया और उन्हें लेकर जीएनडीएच पहुंचे । घायलों को कार में बैठाने से पहले उन्होंने एक 14 वर्षीय बच्चे को भी कार में बैठाने की कोशिश की, लेकिन जब उसे कार में बैठाने लगे तो तब तक वह दम तोड़ चुका था। इसलिए उन्होंने उसे वही रहने दिया ताकि उसके परिजनों को ढूंढने में कोई दिक्कत न आए। गुरु नानक देव अस्पताल में अपने नजदीकी रिश्तेदारों के साथ पहुंचे कंटोनमेंट निवासी राज सिंह दुर्घटना में घायल अपने बेटे की हालत जानने के लिए काफी परेशान दिखाई दिए। हालांकि उनके नजदीकी रिश्तेदारों को अस्पताल में मौजूद लोगों ने जानकारी दे दी थी कि साहिब सिंह का देहांत हो चुका है और शव को पोस्टमार्टम के लिए डेडहाउस भेज दिया गया है। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्हें साहिब सिंह के फोन से ही कत्थूनंगल थाने में तैनात पुलिस मुलाजिम की कॉल आई थी। जिसने हादसे के बारे में जानकारी दी थी। लेकिन वह फिलहाल साहिब सिंह की मौत के बारे में उसके पिता को जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। घायलों को अस्पताल लेकर पहुंचे लोग। -फोटो: सुनील कुमार बस चालक पीछे से ही काफी तेज रफ्तार से आ रहा था। उसे कई सवारियों ने स्पीड धीमी करने के लिए कहा था मगर उसने एक नहीं सुनी। जब वह खुशीपुर के पास पहुंचे तो बस की रफ्तार का अंदाजा लगाए बिना ही टिप्पर चालक ने यू–टर्न लेना शुरू कर दिया। पीछे बस चालक तेज रफ्तारी को कंट्रोल नहीं कर पाया और उसने अपनी साइड बचाते हुए कंडक्टर वाली साइड का हिस्सा टिप्पर में मार दिया। हादसे के बाद लोगों ने घायलों को निकाल पर सड़क किनारे लेटाया। इस दौरान कार मालिकों ने एंबुलेंस का इंतजार किए बिना घायलों को अस्पताल पहुंचाया। देर होती तो कई जानें जा सकती थीं। -जैसा मौके पर मौजूद दिलप्रीत सिंह ने बताया


