प्रदेश में इस बार न्यू ईयर टूरिज्म रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 25 दिसंबर से 10 जनवरी तक प्रमुख नेशनल पार्क कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच में इको-पर्यटन के लिए 100 फीसदी तक की बुकिंग हो चुकी है। कोर जोन सफारी की सीटें करीब दो महीने पहले ही पूरी तरह फुल हो गई थीं। पिछले वर्षों की तुलना में इस सीजन में बुकिंग में सबसे बड़ी छलांग दर्ज की गई है। भीड़ को मैनेज करने के लिए पार्क प्रबंधन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटकों को किसी तरह की दिक्कत न हो। बढ़ी डिमांड को देखते हुए रातापानी टाइगर रिजर्व ने भी मंगलवार को दो नए गेटों पर सफारी की शुरुआत की। इधर, पर्यटक बुकिंग के लिए परेशान हैं। ट्रैवल एजेंट्स का कहना है कि वे सफारी के लिए चार गुना तक अधिक भुगतान देने को तैयार हैं। टाइगर रिजर्व की डिमांड ऐसी कि पर्यटक 4 गुना तक भुगतान को तैयार पेंच-बांधवगढ़: बुकिंग में 35% उछाल
क्रिसमस और न्यू ईयर के दौरान पेंच और बांधवगढ़ नेशनल पार्कों में भी पर्यटक भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस बार बुकिंग में करीब 35% की वृद्धि दर्ज की गई है। पार्क प्रबंधन का कहना है कि बुकिंग में इतनी वृद्धि पिछले कई वर्षों की तुलना में अब तक का सबसे बड़ा उछाल है। होटल-रिसॉर्ट्स भी 100 फीसदी बुक
सफारी ही नहीं, बल्कि पेंच, कान्हा, बांधवगढ़, अमरकंटक, भेड़ाघाट, पचमढ़ी, बरगी, सतपुड़ा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल और रिसॉर्ट की भी 100% तक बुकिंग हो चुकी हैं। राज्य पर्यटन विकास निगम का कहना है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह से जनवरी की शुरुआत तक पर्यटकों की मौजूदगी से यह गुलजार रहेंगे। बुकिंग बढ़ने के तीन कारण… विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बुकिंग में आई बढ़ोतरी के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं- पहला, दिसंबर-जनवरी में ठंड का मौसम जंगल सफारी को और रोमांचक बनाता है। दूसरा- क्रिसमस और न्यू ईयर के अवकाश में लोग प्राकृतिक स्थानों पर समय बिताना पसंद करते हैं। तीसरा- प्रकृति आधारित पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से जंगल, जलप्रपात और प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थलों की ओर पर्यटकों का रुझान बढ़ा है। मप्र में अब 9 टाइगर रिजर्व
पिछले साल डॉ. विष्णु वाकणकर रातापानी और उसके बाद माधव टाइगर रिजर्व बनने के बाद मप्र में कुल 9 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। इनमें प्रवेश के लिए सोमवार से शुक्रवार तक छह पर्यटकों के समूह से ₹2640 और शनिवार-रविवार को ₹3300 रुपए का शुल्क लिया जाता था। इसके अलावा जिप्सी के लिए अलग से 3000 रुपए तक देने पड़ते हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट दर दोगुनी होती है। एमपी ऑनलाइन के माध्यम से सफारी बुक कर सकते हैं।


