सरकार ने NHRC को सौंपी दौसा बोरवेल हादसे की रिपोर्ट:कहा- डेढ़ महीने पहले ही बंद करा दिया, दोबारा खोल लेने पर गिरा मासूम

दौसा जिले में 150 फीट ज्यादा गहरे खुले बोरवेल में गिरने से 5 साल के मासूम की मौत मामले में राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को अपनी रिपोर्ट सब्मिट कर दी है। सरकार की ओर से मुख्य सचिव और डीजीपी ने रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस बोरवेल में 9 दिसम्बर को मासूम गिरा। उस बोरवेल को करीब डेढ़ महीने पहले 23 अक्टूबर, 2024 को ही स्थानीय अधिकारियों ने चिह्नित कर बंद करने के निर्देश दिए। भूमि मालिक ने निर्देशों के पालन का आश्वासन भी दिया था। लेकिन बाद में बोरवेल को दोबारा खोल लिया गया, जिसके कारण यह घटना हुई। सरकार ने आयोग को आश्वस्त किया है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं हो, उसके लिए कड़ी निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 12 दिसम्बर को सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। तत्काल बचाव कार्य शुरू किया
सरकार की ओर से जवाब पेश करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने बताया कि घटना की पहली सूचना जिला प्रशासन और पुलिस को मिली। करीब 30 मिनट में ही अधिकारी मौके पर पहुंच गए। कुछ घंटो के भीतर ही व्यापक बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और सिविल डिफेंस की टीमें विशेष उपकरणों, जैसे जेसीबी, पाइलिंग मशीन, ऑक्सीजन आपूर्ति, और निगरानी कैमरों के साथ मौके पर पहुंची। बिना रुके 56 घंटे से ज्यादा समय तक खुदाई का काम जारी रहा। बच्चे को बचाने के सभी तरह के प्रयास किए गए। लेकिन इसके बावजूद 11 दिसम्बर को बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। दौसा के बाद हुई कोटपूतली में घटना
दौसा बोरवेल हादसे में बेशक सरकार ने अपनी रिपोर्ट पेश करके भविष्य में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए कड़ी निगरानी की बात कही हो, लेकिन सच्चाई इससे अलग नजर आती है। दौसा बोरवेल हादसे के 13 दिन बाद ही कोटपूतली के किरतपुरा में 3 साल की चेतना गिर गई। जिसे 10 दिन चले रेसक्यू ऑपरेशन के बाद भी नहीं बचाया जा सका।

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