राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय शक्ति संगम का समापन रविवार को हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गढ़ राघौगढ़ के पॉलिटेक्निक कॉलेज प्रांगण में संघ का यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। शारीरिक प्राकट्य कार्यक्रम के साथ इसका समापन हुआ। शारीरिक प्रमुख की मौजूदगी में स्वयंसेवकों ने शारीरिक क्रियाएं की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यक्षेत्र के शारीरिक प्रमुख गंगा राजीव पांडे ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 100वें वर्ष में प्रवेश हो रहा है। 1925 को संघ की एक शाखा से शुरुआत हुई। डॉ. हेडगेवार ने 12 लोगों के साथ नागपुर से एक शाखा का प्रारंभ किया। आज देश भर में 70 हजार से अधिक संघ की शाखा चल रही हैं। संघ कोई व्यायाम शाला नहीं है, संघ तो राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला है। दूसरे दिन पथ संचलन निकाला गया था बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय राघोदय की शुरुआत शुक्रवार को प्रदर्शनी उदघाटन के साथ हुई। इसके बाद अलग-अलग विषयों पर बौद्धिक हुए। कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को राघौगढ़ में पथ संचलन निकाला गया था। लगभग 2 हजार स्वयंसेवक इसमें शामिल हुए। प्रांत प्रचारक विमल- हम केवल सत्ता से परिवर्तन की आस नहीं रखते दूसरे दिन बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता ने कहा था कि इस शक्ति संगम के माध्यम से राधौगढ़ जिले के प्रत्येक मंडल एवं बस्ती में शाखा कार्य पहुंचा है, यह क्षण ऐतिहासिक क्षण है। इस शीत शिविर के माध्यम से सभी कार्यकर्ताओं शताब्दी वर्ष में संघ कार्य के लिए अधिकतम समय देकर कार्य का विस्तार एवं कार्य करना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा था कि हमारा सौभाग्य है कि हम संघ के स्वयंसेवक के नाते समाज कल्याण में सक्रिय रहकर काम कर रहे है और यह कार्य समाज में चेतना के केंद्रों से ही पूर्ण होगा। अगर आपको राष्ट्र भक्ति और व्यक्तित्व का निर्माण करना हे तो संघ की शाखा में आना होगा। संघ एकमात्र ऐसा संगठन है जो नित्य शाखा में आने वाले स्वयंसेवको को संस्कारयुक्त कर उन्हें पारस के समान बहुमूल्य बना देता है। ये स्वयंसेवक समाज में जाकर पारस से पारस का निर्माण करते है। हम केवल सत्ता से परिवर्तन की आस नहीं रखते।


