बाड़मेर ने दिखाई देश को पानी इकट्ठा करने की राह:केयर्न वेदांता ने नाड़ी, खड़ीन बनाकर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को दिया बढ़ावा

केयर्न ने बाड़मेर तेल उत्पादन के साथ-साथ उन्नति स्कीम के जरिए नाडी, तालाब, खड़ीन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चारागाह विकास और प्राकृतिक संसाधन के जरिए एक मॉडल को आगे बढ़ाने का काम किया है। कंपनी ने 30 से अधिक नाडी, 1000 खड़ीन, 90 बारिश का पानी इकट्‌ठा करने और जल स्तर बढ़ाने के साथ जल सुरक्षा को मजबूत किया है। इन पहलों ने न सिर्फ पानी की उपलब्धता बढ़ाई है, बल्कि किसानों और ग्रामीण समुदायों की आजीविका सुरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, केयर्न के अधिकारियों ने जिला कलेक्टर को फोटो फ्रेम भेंट कर बधाई दी। दरअसल, रेगिस्तानी बाड़मेर जिला जहां कभी जीवन पानी की तलाश में भटकता था, अब नवाचार, सामुदायिक सहभागिता और प्रशासनिक नेतृत्व के प्रयासों से जल संरक्षण का ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। इसी बदलाव की बदौलत बाड़मेर को देश की राष्ट्रपति द्वारा “जल संचय उत्कृष्टता पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। 18 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह पुरस्कार बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी को प्रदान किया। भवनों की छतों पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग से लेकर झीलों, तालाबों और बावड़ियों के संरक्षण तक अभियान के व्यापक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहते हुए 2 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई है। वेदांता केयर्न ने निभाई भूमिका बाड़मेर की इस सुनहरी यात्रा में वेदांता केयर्न ने सशक्त भागीदार के रूप में अहम भूमिका निभाई है। थार क्षेत्र की कठोर जल वास्तविकताओं को बदलने के उद्देश्य से केयर्न ने जिला प्रशासन और समुदायों के साथ मिलकर नाड़ियों, खड़ीनों और वर्षा जल संग्रहण संरचनाओं का व्यापक पुनर्जीवन किया। जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ और ग्रामीण आजीविका को स्थिर आधार मिला। 145 गांवों और 36 ग्राम पंचायतों में 10 हजार किसानों को लाभ इसके परिणामस्वरूप 145 गांवों और 36 ग्राम पंचायतों के 10,000 से अधिक किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। हर साल लगभग 3.4 मिलियन घन मीटर जल पुनर्भरण के वैज्ञानिक और मापनीय परिणामों ने सिद्ध किया है कि उद्योग, प्रशासन और समुदाय की त्रिपक्षीय साझेदारी जल संरक्षण में ऐतिहासिक परिवर्तन ला सकती है। “नाड़ी, खड़ीन और वर्षा जल संरचनाओं के पुनर्जीवन से हर साल लगभग 3.4 मिलियन घन मीटर भूजल रिचार्ज होना इस बात का प्रमाण है कि जब उद्योग, प्रशासन और समुदाय साथ खड़े हों तो मरुस्थल भी जल-समृद्ध भविष्य गढ़ सकता है।

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