मार्घशीर्ष पूर्णिमा पर चंद्रमा सबसे अधिक बलवान:दिखाई दिया कोल्ड सुपरमून, पृथ्वी के निकट होने से राशियों पर सकारात्मक प्रभाव

मार्घशीर्ष पूर्णिमा पर सुपर मून का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस अवसर पर लोगों में खासा उत्साह रहा और उन्होंने अपने घरों व मंदिरों में चंद्र देव की विशेष पूजा-अर्चना की। लोगों ने कोल्ड सुपरमून देखा। ज्योतिषाचार्य पंडित विजय भूषण वेदार्थी ने मार्घशीर्ष पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साल में चार बार चंद्रमा पूर्ण बलवान होता है, जिनमें से एक मार्घशीर्ष पूर्णिमा है। इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होता है और पृथ्वी के सबसे निकट होता है। पंडित वेदार्थी के अनुसार, चंद्रमा की यह स्थिति जातकों के मन को बलवान बनाती है, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है। जिन राशियों पर शनि की साढ़े साती, राहु या केतु का अशुभ प्रभाव है, उनके लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन चंद्र देव की आराधना करने से कालसर्प दोष और अमावस्या दोष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में सकारात्मकता प्राप्त होती है। इसलिए चंद्र देव की पूजा को सर्वोत्तम बताया गया है। हालांकि, पंडित वेदार्थी ने यह भी बताया कि आज पूर्णिमा तिथि का क्षय हो गया है। इसके चलते जलजातीय स्थानों पर इसके फल थोड़े कष्टकारी हो सकते हैं और जलवायु परिवर्तन से कुछ नुकसान भी संभव है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में इसका प्रभाव सकारात्मक रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से भी सूर्य की स्थिति इस समय बलवान है और वह मंगल के साथ हैं। चंद्र और सूर्य एक-दूसरे को समसप्तक दृष्टि से देख रहे हैं, जो राजनीतिक क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए सर्वोत्तम फल प्रदान करेगा। इसी अवसर पर ग्राम सातऊं से एक धर्म ध्वजा यात्रा एवं परिक्रमा निकाली गई। यह दिव्य यात्रा ग्राम सातऊं से शुरू होकर 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गांवों से गुजरी और अंततः श्री शीतला माता मंदिर, ग्राम सातऊं में संपन्न हुई।

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