बारनवापारा अभयारण्य के खतरनाक गड्ढों को चिन्हांकित करने की मांग की

भास्कर न्यूज | सेल वाइल्डलाइफ कंजरवेशन सोसायटी बलौदा बाजार के अध्यक्ष निखिलेश त्रिवेदी ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि हाल ही में बारनवापारा अभयारण्य से लगे सामान्य वन परिक्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। गहरे और खतरनाक गड्ढे में गिरने से एक नन्हें चीतल शावक (मृगछौना) की भूख-प्यास से तड़पकर मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब शावक किसी मदद की आस में संघर्ष करता रहा, परंतु थककर अंततः दम तोड़ बैठा। त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि घटना में वन विभाग की कोई प्रत्यक्ष लापरवाही नहीं है। गश्त के दौरान एक चौकीदार ने शावक को देखा भी और उसे गड्ढे से बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी। इसके बाद वन अधिकारियों ने नियमानुसार पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कराया। अध्यक्ष निखिलेश त्रिवेदी ने हाल ही में तीन हाथियों के गड्ढे में गिरने की घटना को याद करते हुए वन विभाग की तत्परता और बचाव कार्यों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि वन विभाग की सक्रियता की वजह से जेसीबी मशीनों को तत्काल मौके पर बुलाकर हाथियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया जो सराहनीय है। सोसायटी ने वन विभाग से मांग की है कि बारनवापारा अभयारण्य और उससे जुड़े सामान्य वन क्षेत्रों में मौजूद गहरे एवं तीखे ढाल वाले गड्ढों को तत्काल चिन्हांकित किया जाए और इन गड्ढों की ढाल को कम कर स्लोप बनाया जाए ताकि कोई भी वन्य प्राणी यदि गलती से गिरे तो मानवीय सहायता पहुंचने से पहले स्वयं बाहर निकल सके।इस मांग का समर्थन संस्था के सदस्यों अनादि शंकर मिश्रा, शैलेश गुप्ता, संदीप पांडेय, मधुकांत दीक्षित और नीलम दीक्षित ने भी किया है।

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