क्राइम रिपोर्टर|रांची सुखदेवनगर के तत्कालीन थानेदार अशोक कुमार और इंस्पेक्टर ऑफिस के मुंशी परशुराम कुमार पर रिश्वत लेने का आरोप सही पाया गया है। सिटी एसपी की जांच में पुष्टि हुई है कि थानेदार ने ही नितेश पांडे के भाई नीरज पांडे को मुंशी से बात करने की बात कही थी। मुंशी परशुराम ने नीरज पांडे को यह कहते हुए डरा दिया था कि अगर पैसा नहीं देगा तो उसके भाई को जेल भेज दिया जाएगा। मुंशी ने नितेश को थाने से छोड़ने के लिए 10 लाख में डील फाइनल की, जिसके बाद बाहर स्थित सिन्हा चाय दुकान के पास जाकर 2 लाख रुपए एडवांस लिया। थानेदार अशोक कुमार और मुंशी परशुराम पर लगे आरोप को सिटी एसपी के जांच में सत्य पाया है। सिटी एसपी ने चाय दुकान संचालक का भी बयान दर्ज किया है। ऐसे में अब तत्कालीन थानेदार व मुंशी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। केस मैनेज करने के नाम पर पैसा लिए जाने का आरोप लगने के बाद थानेदार व मुंशी को पहले ही सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। 29 नवंबर को नितेश ने दे दी थी जान मधुकम स्थित रोड नंबर 5 में रहने वाले नितेश पांडे ने 29 नवंबर को अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। नितेश का 25 नवंबर को तिलक चढ़ा था। तिलक चढ़ने के बाद ही एक युवती की शिकायत के बाद सुखदेवनगर पुलिस ने नितेश को थाना बुलाकर जेल भेजने की धमकी दी थी। देर रात पीआर बांड पर छोड़ा गया था। हालांकि अगले दिन फिर युवक को थाना बुलाया गया, जिसके बाद केस मैनेज कराने के नाम पर 10 लाख में डील फाइनल हुई। मुंशी ने 2 लाख रुपए एडवांस लिया, जिसके बाद देर रात थाने से छोड़ा गया। हालांकि इसके बाद भी नितेश की शादी टूट गई। परेशान नितेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।


