पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के जरिए देहाती हलकों में एंट्री कर दी। भाजपा 2027 के लिए ग्रामीण हलकों में पार्टी के लिए ग्राउंड तैयार कर रही है ताकि ग्रामीण हलकों में मजबूती से विधानसभा चुनाव लड़ा जा सके। पार्टी ने राज्य की सभी जिला परिषदों और ब्लॉक समितियों में अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से किसानों की नाराजगी दूर करने में जुटी रही। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री लगातार पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। किसान अब ग्रामीण स्तर पर भाजपा नेताओं का विरोध नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी ने पूरी ताकत से जिला परिषद व ब्लॉक समिति चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनावों के जरिए पार्टी को लोगों के पास केंद्र सरकार की योजनाओं और उनके लाभार्थियों के बारे में जानकारी देने का मौका मिलेगा। पार्टी इसे विधानसभा चुनाव 2027 के लिए महत्वपूर्ण मानकर चल रही है। अकेले मैदान में उतरी भाजपा, गठबंधन की छाया से बाहर अकाली दल के साथ लंबे गठबंधन में भाजपा ग्रामीण चुनावों में नाम मात्र की हिस्सेदारी रखती थी। जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में उम्मीदवार भी सीमित ही उतरते थे। लेकिन इस बार भाजपा पूरे पंजाब के सभी जिलों में बिना किसी सहयोगी दल के अकेले मैदान में है। यह चुनाव भाजपा के लिए संगठन को बूथ स्तर तक खड़ा करने का मौका देंगे। इससे पहले विधानसभा चुनाव-2022 में पार्टी ने पूरे पंजाब में 62 सीटों पर चुनाव लड़ा उसमें से भी ज्यादातर सीटें शहरी क्षेत्र में थी। लोकसभा चुनाव में देहाती हलकों से भाजपा को नाममात्र वोट मिले। किसान आंदोलन की चोट, लेकिन नई रणनीति पर फोकस किसान आंदोलन के बाद भाजपा पर ग्रामीण पंजाब में बड़ी राजनीतिक चोट आई थी। किसान संगठनों ने स्पष्ट रूप से भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया, जिसका असर वोट शेयर तक दिखा। पार्टी ने ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने के लिए विशेष रणनीति तैयार करके फोकस किया, जिसका परिणाम अब दिखने लगा है। 2027 का रोडमैप, ग्रामीण वोट बैंक पर नजर भाजपा की रणनीति 2027 विधानसभा चुनाव पर केंद्रित है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि अगर जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में जमीनी नेटवर्क तैयार हो गया, तो विधानसभा चुनावों में इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपने वोट शेयर को बढ़ाने के लिए फील्ड कैम्पेन, किसान संवाद कार्यक्रम और युवाओं पर विशेष फोकस करने की तैयारी कर चुकी है। राज्य की राजनीति में बदल सकता है समीकरण? कांग्रेस गुटबाजी में उलझी हुई है, अकाली दल भी अभी खुद को रिवाइव करने में जुटा है। आम आदमी पार्टी सरकार होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में दबाव झेल रही है। ऐसे में भाजपा के लिए स्पेस बन सकता है। भाजपा ने अगर अपने सिंबल पर चुनाव लड़ते हुए अच्छे वोट हासिल कर दिए तो पंजाब के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। एक-एक सीट के लिए तीन से पांच आवेदन आए भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि भाजपा अब देहात में भी मजबूत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक सीट के लिए तीन से पांच आवेदन आए। जिसकी वजह से टिकट फाइनल करने के लिए स्टेट इलेक्शन कमेटी को हस्तक्षेप करना पड़ा। हम पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रहे हैं: तरूण चुघ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरूण चुघ ने कहा कि भाजपा जिला परिषद व ब्लॉक समिति चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब के हर गांव तक भाजपा का संगठन पहुंच गया है। भाजपा बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है।


