मौसाजी स्वीट्स व रेस्टोरेंट में स्टेट जीएसटी की जांच तीन दिन में पूरी हुई। जांच में कई खुलासे हुए। सबसे बड़ा खेल मिठाई के कारोबार में मिला। टीम के एक अधिकारी को मंगला स्टोर में चालान मिला था, जिसके बाद स्टेट जीएसटी की टीम मंगला कारखाने तक पहुंची। यहां रोजाना 40 से ज्यादा प्रकार की 1000 किलो मिठाई का उत्पादन मिला। दुकानों में रोज सप्लाई भी हुई, लेकिन टैक्स सिर्फ 50 प्रतिशत मिठाई के कारोबार पर भरा गया। चोरी पकड़े जाने के बाद फर्म ने डेढ़ करोड़ रुपए का टैक्स सरेंडर किया है। दरअसल मौसाजी स्वीट्स के कारखाने से मिठाई दुकानों में मिठाई की सप्लाई इनवाइस की बजाय कच्चे चालान से की जाती थी। मिठाई लेने के बाद दुकान के कर्मचारी चालान फाड़ देते थे। कारखाने में रखा चालान बुक भी नष्ट कर दी जाती थी। इसके बाद महीने के आखिर में अलग इनवाइस तैयार किया जाता था। इसमें मिठाई की मात्रा और वास्तविक कारोबार का सिर्फ 50 % का ही उल्लेख कर उस पर टैक्स भरा जा रहा था। टीम वाइट हाउस पहुंची तो सभी हड़बड़ाए स्टेट जीएसटी ने 1 दिसंबर की सुबह मौसाजी के सभी रेस्टोरेंट में नाश्ता करने के बाद शाम साढ़े 4 बजे दबिश दी थी। पहले दिन देर रात तक जांच में कुछ दस्तावेज ही हाथ लगे। दूसरे दिन फिर सुबह से देर रात तक जांच जारी रही। तब तक मौसाजी एंड कंपनी के मालिक व मैनेजर शांत थे। लेकिन तीसरे दिन जैसे ही टीम वाइट हाउस पहुंची। कंपनी से जुड़े सभी लोग वहां पहुंच गए। पूछताछ में रोजाना 1000 किलो मिठाई बनाने की बात सामने आई और पूरा खेल सामने आया। स्टेट जीएसटी की जांच में ये गड़बड़ी भी आई सामने 1. दिवाली पर 17 और रक्षाबंधन पर 48 हजार की मिठाई खरीदी: रक्षाबंधन व दिवाली पर कारोबार सामान्य दिनों की तुलना में चार से पांच गुना ज्यादा होता है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने अपने इनवाइस में सहायक कंपनी एके इंफ्रा डील से मंगला के रेस्टोरेंट के लिए रक्षाबंधन में 17 हजार और दिवाली पर सिर्फ 48 हजार रुपए की मिठाई खरीदने की जानकारी दी।
2.काउंटरों पर आए नकदी रुपयों पर टैक्स की चोरी: सभी काउंटरों में 60 प्रतिशत नकदी का कारोबार है। 40 प्रतिशत रुपए ग्राहक ऑनलाइन या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। मौसाजी के इनवाइस का मिलान करने पर उन्हें सिर्फ यूपीआई व ऑनलाइन में मिले रुपयों का हिसाब मिला। नकद मिले रुपयों का हिसाब नहीं था।
3. दिवाली में बेचे गए महंगे गिफ्ट बॉक्स का जिक्र नहीं : मौसाजी के किसी भी दुकान से जीएसटी की टीमों को गिफ्ट बॉक्स के बिल, एकाउंट बुक, इनवाइस की जानकारी नहीं मिली। जबकि मौसाजी की सभी स्टोर में दिवाली के दौरान मिठाई व ड्राईफ्रूट्स से भरे गिफ्ट हैंपर 1500 से 2000 तक में बॉक्स ग्राहकों को बेचे गए थे।
4.समोसे के मैदा-आलू व भजिया के बेसन में टैक्स चोरी: रेस्टोंरेंट में समोसे, कचौरी समेत तमाम तरह के उत्पादों के लिए खरीदे गए मैदा, आलू, तेल और बेसन जैसे उत्पाद लेते समय इनपुट टैक्स भरा गया। लेकिन उसे उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत में बेचने के बाद उसपर टैक्स बचा लिया।
5.एक जीएसटी नंबर पर दो दुकान व एक कारखाना : मौसाजी स्वीट्स व रेस्टोरेंट के मालिक तीन अलग-अलग जीएसटी नंबर से पांच स्टोर व एक कारखाना चला रहे थे। श्रीकांत वर्मा मार्ग वाले जीएसटी नंबर से तिफरा व वाइट हाउस के पीछे मिठाई कारखाना मिला। टीम कारखाना पहुंची तो वहां गेट पर कोई बोर्ड नहीं था, ना ही जीएसटी नंबर था। भीतर दस्तावेज भी गायब मिले।


