एसआईआर:महाराष्ट्र से आई बहुओं को राहत… चुनाव आयोग की साइट ऑन, अब ढूंढ सकेंगे नाम

राज्य में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के करीब एक माह बाद अब महाराष्ट्र की मतदाता सूची यहां चुनाव आयोग की साइट पर खुलनी शुरू हुई है। इस वजह से वहां मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद जिन लोगों के नाम सी केटेगरी में डाल दिए गए थे, उनके नाम नए सिरे से ए केटेगरी में जोड़े जा रहे हैं। इससे बीएलओ का काम बढ़ गया है। उन्हें नए सिरे से फार्म भरवाना पड़ रहा है। हालांकि इससे यहां लंबे समय से बसे महाराष्ट्र के नागरिकों, खासतौर पर वहां से शादी होकर आईं बहुओं को राहत मिलेगी। अभी तक वे अपना या अपने माता-पिता की महाराष्ट्र की 2003 की मतदाता सूची पेश कर रहीं थी, तब भी उनका नाम जोड़ा नहीं जा रहा था। क्योंकि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर महाराष्ट्र की सूची नहीं खुल रही थी। इस वजह से ये कंफर्म ही नहीं हो रहा था कि वे जो सूची दे रहे हैं वे सही है या नहीं? महाराष्ट्र की मतदाता सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट में खुलवाने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे थे। अब तकनीकी दिक्कत दूर हुई और जो मतदाता महाराष्ट्र की 2003 की मतदाता सूची प्रस्तुत कर रहे हैं, उनके नामों का मिलान संभव हो सका है। इस वजह से जिन बीएलओ ने अपने सारे गणना पत्र चुनाव आयोग में जमा कर दिए थे, उन सभी को दस्तावेज वापस किए गए। अब वे महाराष्ट्र की मतदाता सूची जमा करने वाले नागरिकों का सूची में मिलान कर रहे हैं। पड़ताल के दौरान पता चला है कि देश के लगभग सभी राज्यों की मतदाता सूची छत्तीसगढ़ चुनाव आयोग की वेबसाइट में आसानी से खुल रही है। बिहार, यूपी, ओडिशा, पं. बंगाल यहां तक कि साउथ के राज्यों की भी मतदाता सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट पर खुल रही है। इस वजह से किसी भी राज्य के मतदाता सूची का मिलान करने में दिक्कत नहीं है। केवल महाराष्ट्र को लेकर दिक्कत थी। सी केटेगरी वाले मतदाताओं से प्रमाण-पत्र लेना किया शुरू एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों का नाम 2003 की सूची में नहीं है और न ही उनके माता-पिता के नाम हैं, उनके फार्म अब जमा किए जा रहे हैं। ऐसे मतदाताओं को सी केटेगरी में रखा गया है। ऐसे मतदाताओं को अब अपने जन्म के अलावा शिक्षा व नागरिकता प्रमाणित करने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। ए-बी केटेगरी वाले वोटर को दिक्कत नहीं ए केटेगरी में उन मतदाताओं को रखा गया है जिनके नाम 2003 की वोटर लिस्ट में हैं। ऐसे मतदाताओं को किसी भी तरह का कोई दस्तावेज जमा करना अनिवार्य नहीं है। इन्हें अपने वोटर लिस्ट की फोटो कॉपी और जरूरी होने पर फोटो देना है। जबकि बी केटेगरी में उन मतदाताओं को रखा गया है जिनके खुद के नाम तो 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है लेकिन उनके माता या पिता का नाम वोटर लिस्ट में हैं। ऐसे मतदाताओं को अपने माता-पिता के नाम की वोटर लिस्ट गणना फार्म के साथ अटैच करनी होगी। इसके अलावा किसी भी तरह का दस्तावेज जमा करना अनिवार्य नहीं है। 98% वोटर के दस्तावेज हुए जमा एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए भले ही निर्वाचन आयोग ने प्रपत्र जमा करने की तारीख 11 दिसंबर तक बढ़ा दी है, लेकिन पूर्व में तय तारीख यानी 4 दिसंबर तक छत्तीसगढ़ में 2.08 करोड़ गणना-प्रपत्र आयोग तक पहुंच चुके हैं। इतने प्रपत्रों का डिजिटलाइजेशन भी पूरा हो चुका है। यानी गणना-प्रपत्रों का 98.19 प्रतिशत मतदाताओं से दस्तावेज लेकर आयोग में जमा कर दिया गया है। बांटे गए प्रपत्रों में अब करीब साढ़े तीन लाख प्रपत्र ही शेष रह गए हैं। आयोग ने सभी बीएलओ को उन करीब 44 हजार घरों तक पहुंचने के लिए फिर से प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

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