सोसायटी पट्टों वाले भूखंड खरीद रहे हैं तो जमा पूंजी गंवा सकते हैं, क्योंकि ऐसी कॉलोनियों में भूखंड खरीद अवैध होगी

राज्य सरकार ने गृह निर्माण सोसायटियों के पट्टों पर धड़ाधड़ काटी जा रहीं कॉलोनियों को अवैध करने के लिए पट्टों की रजिस्ट्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले से अब सोसायटी पट्टों पर बिना लैंड कन्वर्जन के बसी कॉलोनियां अवैध घोषित हो गई हैं। ऐसी कॉलोनियों में भूखंडों की खरीद पूरी तरह अवैध मानी जाएगी। इन कॉलोनियों का नियमन नहीं होगा यानी सोसायटी पट्टों पर बसावट करने पर सड़क, सीवरेज, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। सोसायटी पट्टों की रजिस्ट्री नहीं होने से पट्टे की वैल्यू भी नहीं रहेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर सोसायटी पट्टों के भूखंडों की रजिस्ट्री बंद कर दी है। साथ ही आवासीय कॉलोनियों के भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए अब भू-रूपांतरण (90 ए) करवाना अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने रजिस्ट्रेशन (राजस्थान अमेंडमेंट) एक्ट-2021 को प्रभावी किया है। दूसरी ओर, सरकार के इस फैसले से सोसायटी वालों की चांदी हो गई है। अब सोसायटी संचालक पट्टों का नाम ट्रांसफर कराने के लिए मनमाने तरीके से पैसे वसूलेंगे। ऐसे में सरकार को इन सोसायटियों पर पूरी तरह शिकंजा कसना होगा। एक्सपर्ट व्यू – हनुमान शर्मा, अध्यक्ष, जेडीए बार एसोसिएशन पहले बेचे गए भूखंड भी इस फैसले के दायरे में होंगे, इसलिए इनकी भी रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी इस फैसले से आम लोगों पर क्या बड़ा असर पड़ेगा? अब सोसाइटी के पट्टों वाली कॉलोनियों की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी, क्योंकि जेडीए एक्ट के अनुसार नियमन के लिए लैंड कन्वर्जन जरूरी है। बिना लैंड कन्वर्जन के, पहले से बसी सोसाइटी कॉलोनियां भी नियमन से बाहर हो जाएंगी, जिससे बिजली, पानी, सड़क जैसी सुविधाएं मिलने में दिक्कत होगी। क्या पहले से खरीदे गए और रजिस्ट्री हो चुके सोसाइटी पट्टों को अब दोबारा बेचा जा सकेगा? नहीं। यह आदेश सभी सोसाइटी पट्टों पर लागू है। इसलिए पहले रजिस्ट्री हो चुके सोसाइटी प्लॉट भी बेचने पर रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। क्योंकि चेन ऑफ डॉक्यूमेंट में लैंड कन्वर्जन का कागज नहीं होगा, और बिना कन्वर्जन रजिस्ट्री संभव नहीं है। बैक डेट यानी पुरानी तारीख में जारी किए गए सोसाइटी पट्टों पर अब किस तरह का असर होगा? ऐसे पट्टों पर भरोसा करने वाले खरीदारों को अब नुकसान होगा। बहुत-सी सोसाइटी अब भी बैक डेट में पट्टे काटकर कॉलोनियां बसाती हैं। अब इनका नियमन नहीं होगा, इसलिए बसी हुई कॉलोनियों में भी सुविधाएं मिलने में दिक्कत आएगी। 80% लोग ऐसे हैं, जो रजिस्ट्री नहीं कराते हैं। पट्टे पर खरीदते हैं, ऐसे में उनका क्या होगा? ऐसे लोग रजिस्ट्री नहीं करा पाएंगे, क्योंकि सरकार ने सोसाइटी पट्टों पर रजिस्ट्री रोक दी है। सरकार चाहे तो सोसाइटी के रिकॉर्ड लेकर कन्वर्जन कर सकती है, पर यह प्रक्रिया लंबी और समय लेने वाली है। ऐसी सोसायटियां जो वर्तमान डेट में भी पट्टे जारी कर रही हैं। क्या उनके पट्टे वैध माने जाएंगे? ज्यादातर सोसायटियां बैक डेट में पट्टे देकर अवैध कॉलोनियां बसावट करती हैं। रजिस्ट्री पर प्रतिबंध है तो वर्तमान में पट्टे जारी कर रही सोसायटियां भी दायरे में आएंगी। ये पट्टे अमान्य होंगे। इस फैसले से सरकार को क्या फायदा होगा? सोसायटी पट्टों की रजिस्ट्रियों से मिलने वाला रेवेन्यू कम होगा, पर कन्वर्जन से रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। गहलोत सरकार में पारित बिल के विरोध में आए पूर्व मंत्री गहलोत सरकार में पारित इस बिल के नियमों पर अब पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा- हमारी सरकार का बिल भूमाफिया पर लगाम लगाने वाला था, पर भाजपा सरकार के नियमों से फायदा भूमाफियाओं को लाभ होगा। जनता परेशान और सरकार को नुकसान होगा। इस नियम से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। पहले भूखंड रजिस्ट्री कम दाम में जाती थी, लेकिन नए नियम के अनुसार सरकार पट्टों की रजिस्ट्री नहीं करेगी और नाम ट्रांसफर के नाम पर भूमाफिया भारी वसूली करने का खेल चालू कर देंगे। इस फैसले के विरोध में उतरे वकील, प्रदर्शन-नारेबाजी की, रजिस्ट्री बंद… डिस्ट्रिक्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जयपुर के नेतृत्व में गुरुवार को वकील सोसाइटी पट्टों से रजिस्ट्री न किए जाने के विरोध में उतर गए। इससे शहर में रजिस्ट्रियों का काम ठप रहा। वकीलों ने कलेक्ट्रेट बंद का आह्वान किया और सोसायटी पट्टों की रजिस्ट्री नहीं करने पर प्रदर्शन व नारेबाजी भी की। बाद में वकीलों ने इस संबंध में कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी को भी ज्ञापन दिया।

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