राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के संशोधित नियम 266 को चुनौती देने वाली याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने खारिज कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने 3 दिसंबर 2025 को सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि सामान्य बच्चों को पढ़ाने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Special Needs) को पढ़ाने की प्रक्रिया पूरी तरह अलग है, इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग कैडर और योग्यता होना उचित है। राज्य को इन दोनों की अलग-अलग योग्यताएं निर्धारित करने का अधिकार है। याचिका में क्या थी मांग? जोधपुर, उदयपुर और डीडवाना (नागौर) जिलों के प्रदीप गुर्जर, दिलीप कुमार, सुमन, मधु प्रजापत और संजय पंवार सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के संशोधित नियम 266 को चुनौती दी थी। इसमें राज्य सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक बीकानेर, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) नई दिल्ली और भारतीय पुनर्वास परिषद नई दिल्ली को प्रतिवादी बनाया गया। वकील ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्पेशल एजुकेशन में एलिमेंट्री टीचर की योग्यता रखता है, तो उसे जनरल एजुकेशन के प्राइमरी और अपर-प्राइमरी टीचर पद के लिए भी योग्य माना जाना चाहिए। उन्होंने इसी आधार पर जनरल एजुकेशन के लिए जारी विज्ञापन को भी चुनौती दी थी। वकील ने तर्क दिया कि विज्ञापन में NCTE की 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 की अधिसूचनाओं में उल्लेखित योग्यताओं को हटा दिया गया है। राज्य प्राधिकरण NCTE द्वारा निर्धारित योग्यताओं से अलग नहीं हो सकते, क्योंकि NCTE कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता तय करने वाली प्राथमिक संस्था है। कोर्ट ने कहा- दोनों का कार्यक्षेत्र अलग मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने सही तरीके से पदों को ‘जनरल एजुकेशन’ और ‘स्पेशल एजुकेशन’ में विभाजित किया है। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा- हालांकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल शिक्षक के पद अध्यापन के लिए हैं, लेकिन विशेष शिक्षा (Special Education) के लिए शिक्षण प्रक्रिया सामान्य शिक्षा (General Education) से पूरी तरह अलग है। रेसिप्रोकल (Reciprocal) नियम का हवाला कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस तरह जनरल एजुकेशन के लिए ट्रेंड शिक्षक, स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्य नहीं होते, ठीक उसी तरह स्पेशल एजुकेशन में प्रशिक्षित शिक्षक, जनरल एजुकेशन के स्कूलों में पढ़ाने के पात्र नहीं हो सकते। एनसीटीई (NCTE) की योग्यता के तर्क पर कोर्ट ने कहा कि एनसीटीई द्वारा निर्धारित योग्यता एक सामान्य नियम है, लेकिन राज्य सरकार को विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर चयन प्रक्रिया और योग्यता तय करने का अधिकार है। नियम 266 वैध करार, याचिका खारिज कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तव में, NCTE में विशेष शिक्षा की योग्यता केवल उन छात्रों को पढ़ाने के लिए है, जिन्हें विशेष शिक्षा की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि ये दो अलग-अलग वर्ग हैं और इसलिए राज्य द्वारा अलग चयन प्रक्रिया और अलग योग्यताएं बनाई जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि तर्कों के समय याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा कोई अन्य आधार नहीं उठाया गया। इसलिए कोर्ट ने NCTE द्वारा निर्धारित योग्यताओं के विपरीत नियम 266 को अवैध मानने का कोई कारण नहीं पाया। कोर्ट ने रिट याचिका को गलत धारणा पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया।


