एमबी में रक्त संकट: थैलेसीमिया रोगी परेशान, तीमारदार ढूंढते फिर रहे डोनर

संभाग का सबसे बड़ा एमबी अस्पताल खून की कमी से जूझ रहा है। इसके ब्लड बैंक में महज 282 यूनिट ब्लड बचा है। क्षमता 1500 यूनिट है। गंभीर बात ये कि उपलब्ध स्टॉक में से भी लगभग 60 यूनिट वीआईपी विजिट के चलते रिजर्व में रखना जरूरी है। मरीजों के लिए प्रभावी स्टॉक बेहद कम होने से सबसे ज्यादा परेशान थैलेसीमिया पीड़ित हैं, जिन्हें नियमित रूप से हर 20 से 30 दिनों में एक यूनिट खून की जरूरत होती है। जिले में ऐसे करीब 300 मरीज हैं। इन्हें और इनके परिजनों को रक्तदाता तलाशने पड़ रहे हैं। एमबी में रोज 80 से 85 यूनिट खून की खपत होती है। इनमें हादसों में घायल होने और प्रसव संबंधी मामलों में रोज औसत 25-25 यूनिट चाहिए। इसके अलावा शिशु रोगों से जुड़े मामलों में 15 से 20 यूनिट की जरूरत रहती है। पेंच ये है कि इन सभी मामलों में तीमारदार या परिचित रक्तदान के लिए जैसे-तैसे मिल जाते हैं, लेकिन थैलेसीमिया, कैंसर व अन्य आईपीडी के अन्य रोगियों के लिए रोज की 15 से 20 यूनिट की व्यवस्था नहीं हो पाती। बता दें, दो सप्ताह पहले शहर में हुए बड़े आयोजन के दौरान वीआईपी विजिट बढ़ा था। तब अस्पताल प्रशासन को चित्तौड़ से 50 यूनिट खून मंगवाना पड़ा था। कोटा-भीलवाड़ा से भी मांग की गई थी। वहां से भी मदद नहीं मिली थी, क्योंकि उपलब्धता नहीं थी। बता दें कि उदयपुर में नवंबर तक 11 माह में 15 संगठनों ने 43 शिविर लगाकर 3035 यूनिट रक्तदान किया है।

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