अफसरों का संरक्षण पाकर माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वो शहर के सबसे बड़ी आबादी वाले क्षेत्र दीनदयाल नगर -शताब्दीपुरम के पास भी अवैध खनन करने से नहीं चूक रहे। अफसर-माफिया के इस गठजोड़ से हो रहे अवैध खनन ने बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात राकेश जाटव की जान ले ली। यहां विक्रमपुर पहाड़ी से बिना किसी पट्टे, बिना किसी अनुमति के अवैध तरीके से मुरम खोदी जा रही है। वह भी कुछ दिनों से नहीं बल्कि 8-9 वर्षों से, गुरुवार को मृतक के भाई राजेश ने बताया कि उसका भाई 5 वर्ष से गंभीर लोधी के यहां ड्राइवर है। इस पहाड़ी से मुरम ले जाकर सप्लाई करता था। मतलब साफ है कि शहरी क्षेत्र में कई वर्षों से माफिया खुलेआम पहाड़ी खोद-खोद कर खोखला कर रहा। लेकिन खनिज विभाग की टीम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए कोई कार्यवाही भी नहीं हुई। इससे पहले अवैध रेत की ट्रॉली से टकराने से 5 युवकों की मौत हो गई थी। न खनन रोका, न पत्थर खदानों में क्लोजर प्लान का पालन कराया, इसलिए बढ़ी घटनाएं खनिज विभाग के अधिकारी शासन के नियमों का पालन करने की जगह माफिया से संबंध निभाने को ज्यादा तरजीह देते हैं। जिसका सीधा उदाहरण शताब्दीपुरम क्षेत्र है। यहां मुरम के लिए अवैध तरीके से न सिर्फ पहाड़ खोदा जा रहा है। बल्कि यहां रेत के अवैध डंप के ढेर लगे हुए हैं। इतना ही नहीं अवैध रेत, मुरम और गिट्टी के डंपर व ट्रेक्टर ट्रॉली इस आबादी क्षेत्र से दिन-रात हाइवे के लिए दौड़ते हैं। फिर भी खनिज विभाग कोई मॉनिटरिंग या कार्रवाई नहीं करता। यहां पत्थर खदानों से कई वर्षों तक पत्थर निकालने के बाद पट्टाधारक खदानें बिना बंद किए निकल गए। आज ये खदानें 250 से 270 फीट गहरी खाई में बदली हुई हैं। जिनमें कभी भी हादसे हो रहे हैं, एनजीटी ने इन गड्ढों को नियमानुसार भरवाने के भी आदेश दिए। लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। ऐसा ही हाल रेशमपुरा-बदनापुरा के पास के पहाड़ों का भी है। यहां भी खुलेआम पत्थरों का खनन होता है। जिम्मेदार का तर्क-एक जेसीबी को जब्त किया, पहले भी कार्रवाई की, लेकिल लोग नहीं मानते विक्रमपुर में मुरम की कोई खदान वैध नहीं है। हमने वहां से एक जेसीबी पकड़ी है। हाल ही में तो कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की, लेकिन पहले कार्रवाई की थी। फिर भी लोग नहीं रुकते, अब क्या कर सकते हैं। – घनश्याम सिंह यादव, प्रभारी खनिज अधिकारी


