अखिल भारतीय कालिदास समारोह में शहरवासियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से कलश यात्रा निकाली थी। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग पर रंगोली बनाने के लिए 53 हजार 900 रुपए का भुगतान कर दिया गया, जबकि कलश यात्रा शुरू होते ही बारिश शुरू हो गई थी। बरसते पानी के बीच ही कलश यात्रा निकाली गई थी। इस वर्ष 67वां अभा कालिदास समारोह 1 से 7 नवंबर तक अकादमी परिसर में हुआ था। 31 अक्टूबर की सुबह मंगल घट स्थापना के उपलक्ष्य में रामघाट से कलश यात्रा निकाली थी, जो अकादमी पहुंची थी। कलश यात्रा में अलग-अलग क्षेत्रों से कलाकारों को भी आमंत्रित किया था। साथ ही पूरे कलश यात्रा मार्ग में रंगोली बनाने के लिए भी कलाकारों को आमंत्रित किया था। यात्रा से पहले कलाकारों ने रामघाट के समीप एक रंगोली जरूर बनाई लेकिन जैसे ही रामघाट से कलश यात्रा शुरू हुई, वैसे ही बारिश शुरू हो गई थी। सभी कलाकार एवं यात्रा में शामिल गणमान्य नागरिक भीग गए थे। कलश यात्रा के टावर आने तक बारिश होती रही थी। ऐसे में पूरे मार्ग में कितनी जगह रंगोली बन पाई होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकर हैरानी होगी कि यात्रा में रंगोली बनाने के लिए संस्कार भारती को 53 हजार 900 रुपए का भुगतान किया गया। 13 नवंबर की तारीख में चेक भी संस्था को दिया गया। अकादमी में भी एक दिन बाद बनाई थी रंगोली
कलश यात्रा शुरू होने से पहले रामघाट पर रंगोली बनाई गई थी। पूरे मार्ग में रंगोली बनाने के अलावा अकादमी परिसर में भी रंगोली बनाई जाना थी लेकिन बारिश की वजह से उस दिन अकादमी परिसर में भी रंगोली नहीं बनाई जा सकी। एक दिन बाद यानी 1 नवंबर को अकादमी परिसर में रंगोली बनाई गई थी। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि मप्र शासन के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में कालिदास अकादमी और सम्राट विक्रमादित्य विवि द्वारा अखिल भारतीय कालिदास अकादमी का आयोजन किया जाता है। विवि के ललित कला विभाग में कई विद्यार्थी हैं, जो आकर्षक रंगोली बनाते हैं। यदि आयोजन संस्था के इस विभाग से ही विद्यार्थियों को आमंत्रित कर लिया जाता तो हजारों का खर्च बचाया जा सकता था। कालिदास समारोह में नहीं जुट पाई थी भीड़
इस वर्ष हुए 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह के लिए 3 करोड़ रुपए का बड़ा बजट स्वीकृत किया गया था। भीड़ जुटाने के लिए तमाम दावे किए गए लेकिन समारोह के शुभारंभ और समापन समारोह में भीड़ नहीं जुट पाई थी और कुर्सियां खाली रह गई थी। केवल रंगों काे खरीदने के लिए भुगतान किया ^ कलश यात्रा में रंगोली बनाने के लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाता, केवल रंगों को खरीदने के लिए भुगतान किया जाता है। इस बार 50 हजार रुपए के आसपास का भुगतान किया गया है। यह सही है कि इस वर्ष कलश यात्रा के दौरान बारिश हो रही थी। यात्रा में जितनी जगह भी रंगोली बन सकी, वह कलाकारों ने बनाई।
डॉ. गोविंद गंधे, निदेशक, कालिदास संस्कृत अकादमी


