उज्जैन नगर निगम शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए 7 दिन नो-डिस्पोजल अभियान शुक्रवार से शुरू करने जा रहा है। निगम की आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) टीम सभी वार्डों में जाकर चाय दुकानों, गुमटियों और होटल संचालकों को डिस्पोजल के स्थान पर कांच, स्टील और मिट्टी के बर्तनों के उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। व्यापारियों से बात करने के साथ ही टीम द्वारा महापौर और निगम परिषद के निवेदन पत्र भी देते उन्हें डिस्पोजल से वाले नुकसान बताए जाएंगे। स्मार्ट सिटी द्वारा आईईसी गतिविधियों के लिए 8 करोड़ का टेंडर किया है। चार कंपनियों के 100 से ज्यादा वॉलंटियर शहर में जागरूकता गतिविधि करेंगे। इस क्रम में ही हर कचरा वाहन के साथ दो वॉलंटियर रहेंगे, जो व्यापारियों को भी समझाइश देंगे। निगम द्वारा 7 दिनों तक का समय दिया जाएगा। उसके बाद भी डिस्पोजल का उपयोग होता है, तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पानी-पतासे बेचने वालों को भी स्टील की प्लेट अपनाने की सलाह दी जाएगी। गर्म पेय से प्लास्टिक गलती जो कैंसर का खतरा बढ़ाती माधव नगर अस्पताल कैसर विभाग प्रभारी डॉ. अमीत सोनी ने बताया कि डिस्पोजल कप-ग्लास में लगी माइक्रो प्लास्टिक की परत गर्म चाय, कॉफी या सूप के संपर्क में आते ही पिघलने लगती है। इससे बीपीए, माइक्रो- प्लास्टिक और हानिकारक रसायन सीधे शरीर में पहुंच जाते हैं। रोजाना प्लास्टिक में गर्म पेय पीना धीरे-धीरे शरीर में जहरीले तत्व जमा करता है। इससे मुख्य रूप से आंत, लीवर और किडनी के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए कांच, मिट्टी और स्टील के बर्तन ही सुरक्षित विकल्प हैं। होटल वालों से की अपील महापौर मुकेश टटवाल ने व्यापारी वर्ग, होटल, गुमटी वालों और चाय विक्रेताओं से अपील की है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक और डिस्पोजल का उपयोग बंद करें। उपायुक्त योगेंद्र पटेल ने बताया कि कागज के डिस्पोजल कप भी सुरक्षित नहीं होते, क्योंकि उनमें प्लास्टिक की परत लगी होती है।


