बांसवाड़ा जिले की आबापुरा ग्राम पंचायत के पुनर्गठन के सरकारी फैसले से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को ढोल-नगाड़ों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। उन्होंने पंचायत विभाजन वापस लेने की मांग की। राज्य सरकार द्वारा आबापुरा पंचायत के 4 महत्वपूर्ण गांवों जसवंतपुरा, अमरपुरा, फतेहपुर और बलिया खुर्द को अलग कर नई ग्राम पंचायत बदरैल खुर्द में शामिल किया, इस फैसले के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग को जल्द ही स्वीकार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। इस बारे में चर्चा पर पूर्व मंत्री धनसिंह रावत ने बताया की ग्रामीण जो सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है। आबापुरा मेरे विधानसभा क्षेत्र में आता है, मैं तो उसके विकास की सोचता हूं। ओर मैं किसी तहसीलदार से नहीं मिला। ढोल-नगाड़ों के साथ ज्ञापन देने पहुंचे कलेक्ट्री पुनर्गठन के विरोध में शुक्रवार को चारों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने इस निर्णय को अनुचित और अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि ये गांव भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक रूप से दशकों से आबापुरा पंचायत से जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि इन गांवों को नई और दूर स्थित बदरैल खुर्द पंचायत में जोड़ना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है, और इससे ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक परेशानी होगी। मांगे नहीं मानने पर करेंगे व्यापक आंदोलन ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पुनर्गठन में हुई इस त्रुटि को तुरंत सुधारा जाए और इन चारों गांवों को पूर्ववत ग्राम पंचायत आबापुरा में ही रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इस प्रमुख मांग को जल्द ही स्वीकार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।


