खुलासा:कम क्षमता की मोटर ने बढ़ाई बिजली की खपत, 22 निकायों को 20 करोड़ की चपत

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में हुई एनर्जी ऑडिट में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। प्रदेश के 22 निकायों में की गई ऑडिट के बाद यह पता चला है कि इन निकायों ने कम क्षमता के मीटर कनेक्शन का लंबे समय तक अधिक उपयोग किया, जिसके कारण इन निकायों को दो साल में लगभग 20 करोड़ रुपए ज्यादा बिजली का बिल जमा करना पड़ा। अब इन निकायों को हाईटेंशन का लोड बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, डीआरए कंसलटेंट नागपुर द्वारा कराए गए एनर्जी ऑडिट के माध्यम से नगरीय निकायों में बिजली की वास्तविक खपत और व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, कमियों की पहचान के साथ ही बिजली बिल के भुगतान को लेकर डाटा तैयार किया गया है। इस दौरान बिजली बिल के भुगतान का विश्लेषण भी किया गया, जिसमें यह खामी पाई गई। राज्य शहरी विकास अभिकरण ने इन निकायों को चिट्ठी भेजकर इसकी जानकारी दी है। उनसे कहा गया है कि एनर्जी बिल ऑडिट संस्था ने 22 निकायों के 84 हाईटेंशन कनेक्शन का डेस्क ऑडिट किया है। इसमें कुछ प्रकार की कमी पाई गई। विद्युत विनियामक आयोग द्वारा जारी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड 2011 के टैरिफ आदेश के मुताबिक, यदि किसी माह अधिकतम मांग, अनुबंधित मांग से अधिक हो जाती है तो टैरिफ की सामान्य दर केवल अनुबंधित मांग तक ही लागू होती है। लेकिन इससे 20 फीसदी अधिक बिजली का उपयोग होने पर डेढ़ गुना शुल्क से दो गुना शुल्क लिया जाता है। इसी तरह, यदि किसी माह अधिकतम मांग अनुबंधित मांग के 80 फीसदी से कम पाई जाती है तो अनुपयोगी मांग की भुगतान राशि 375 रुपए प्रति किलोवाट की दर से किया जाता है। इन निकायों का किया गया ऑडिट: अंबिकापुर, अमलेश्वर, भिलाई, बिलासपुर, बिरगांव, चिरमिरी, दल्ली राजहरा, धमतरी, डोंगरगढ़, दुर्ग, गोबरा नवापारा, जगदलपुर, कांकेर, कोरबा, महासमुंद, मनेंद्रगढ़, पाटन, रायगढ़, रायपुर और राजनांदगांव। इसलिए कराया गया ऑडिट: दरअसल, शहरी क्षेत्रों में पानी सप्लाई और स्ट्रीट लाइटिंग जैसी विभिन्न सुविधाओं के संचालन के लिए नगरीय निकायों में बड़ी संख्या में बिजली कनेक्शन लिए गए हैं। इसके लिए बिजली विभाग द्वारा सभी 184 नगरीय निकायों में हजारों मीटर लगाए गए हैं। इनके माध्यम से हर महीने मीटर रीडिंग कर विभाग द्वारा बिजली बिल भेजा जाता है। इसके लिए निकायों द्वारा हर माह एक बड़ी बिजली बिल के रूप में भुगतान किया जाता है। कई बार सरचार्ज और एरियर्स के रूप में भी विभाग को अतिरिक्त राशि का भुगतान निकायों और नगरीय प्रशासन विभाग को करना पड़ता है। विभाग द्वारा निकायों में बिजली बिल के समायोजन के लिए बिजली विभाग को हर साल लगभग 100 से 200 करोड़ रुपए की राशि दी जाती है। सोलर एनर्जी से निकाय होंगे रौशन: बिजली बिल का विश्लेषण करने के बाद विद्युत दक्ष उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देने, विद्युत खपत में कमी के लिए चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा प्रणाली को विकसित करने की प्लानिंग की जा रही है। चूंकि भारत सरकार भी पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम, पीएम सूर्योदय तथा पीएम सूर्यघर जैसी अभिनव योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। हाई-टेंशन कनेक्शन ने बढ़ाया बिल:

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