राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में अभी तक सरकारी नौकरी, कारोबार और अच्छी आय वाले लोग ही अपात्र पाए जाते थे, लेकिन इस बार मामला और बड़ा है। गरीबों के हिस्से का गेहूं अब अमीर किसान परिवार हड़पते हुए पकड़े गए हैं। जानकर हैरानी होगी कि भरतपुर व डीग जिले के 352 संपन्न किसान, जिनके पास एक से दस हेक्टेयर तक भूमि है, हर साल 100 से 500 क्विंटल से अधिक गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार को बेचते रहे, फिर भी गरीब बनकर हर माह 30 से 50 किलो तक मुफ्त गेहूं उठाते रहे। राज्य सरकार ने आईएमपीडीएस पोर्टल के जरिए जनाधार नंबर का मिलान कर इस गड़बड़ी को पकड़ा। क्योंकि एमएसपी और एनएफएसए में जनाधार अनिवार्य होता है। अब इन सभी अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द होंगे और अब तक उठाए गए गेहूं की वसूली भी की जाएगी, एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। भरतपुर संभाग में ही आंकड़ा चौंकाने वाला है। भरतपुर के 82, डीग के 270, सवाई माधोपुर के 259, करौली के 55 और धौलपुर के 39 किसान फर्जीवाड़े में शामिल पाए गए। वहीं प्रदेशभर में 41 जिलों में 10,193 कार्डधारक और 10,533 किसान नियम विरुद्ध खाद्यान्न लेते हुए पकड़े गए हैं। जिला रसद अधिकारी पवन अग्रवाल का कहना है कि एक वर्ष में 100 क्विंटल से अधिक गेहूं एमएसपी पर बेचने वाला व्यक्ति पात्र श्रेणी में नहीं आता। ऐसे लोगों द्वारा मुफ्त गेहूं लेना नियम उल्लंघन है। सभी अपात्रों को सूची से हटाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


