1.75 करोड़ की मशीनें कबाड़ निकलीं,सदमे से युवक की मौत:उपभोक्ता आयोग का फैसला- कंपनी 45 दिन में मशीनें ठीक करे, वरना ब्याज सहित रुपए लौटाए

राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जोधपुर की पीठ ने मशीनरी खरीद के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस देवेन्द्र कच्छावाहा और सदस्य लियाकत अली ने अंबाला (हरियाणा) की एक कंपनी को निर्देश दिया है कि वह जोधपुर के एक पीड़ित परिवार को बेची गई खराब मशीनें 45 दिन के भीतर ठीक करके दे, अन्यथा पूरी कीमत यानी करीब 1.75 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटानी होगी। यह मामला दुखद भी है, क्योंकि जिस युवक (नितिन भूरानी) ने अपना रोजगार शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये का निवेश किया था, मशीनें खराब निकलने और भारी आर्थिक नुकसान के चलते ज्यादा तनाव में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। बाद में उसके माता-पिता ने यह कानूनी लड़ाई लड़ी। 1.75 करोड़ का जूस पैकिंग-बॉटल फिलिंग प्लांट जोधपुर के चौपासनी रोड ज्वाला विहार निवासी नितिन भूरानी ने अंबाला की फर्म ‘मैकेनिकल सिस्टम्स’ से जूस पैकिंग और बॉटल फिलिंग के लिए टेट्रा मशीनें और अन्य उपकरण खरीदे। नितिन ने अपने पिता व बैंक से लोन लेकर 26 अगस्त 2022 को 1 करोड़ एक हजार रुपये और 6 फरवरी 2023 को 75 लाख रुपये, कुल 1 करोड़ 75 लाख एक हजार रुपये बैंक के जरिए RTGS से दिए। मशीनों में लगातार खराबी, कंपनी की टीम भी नाकाम रही मशीनों की पहली खेप 22 नवंबर 2022 को प्राप्त हुई, जो किसी काम की नहीं थी। अन्य उपकरणों की अलग-अलग प्राप्ति 8 दिसंबर 2022, 27 दिसंबर 2022, 27 जनवरी 2023, 31 जनवरी 2023, 8 फरवरी 2023, 27 फरवरी 2023, 28 फरवरी 2023, 11 मार्च 2023 और 15 मार्च 2023 को हुई।​ पहली खेप के तीन महीने बाद दो तकनीशियन अमितकुमार और हरजीतसिंह तथा दो मशीन ऑपरेटर पुरुषोत्तमसिंह और हैप्पीसिंह को भेजा गया, जिन्होंने 15-20 दिन में मशीनरी की स्थापना की लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उत्पादन शुरू नहीं कर सके और बिना बताए जोधपुर से चले गए। तीन माह बाद 6 कर्मचारी हैप्पीसिंह, पुरुषोत्तम, प्रिंस, दीपक, तरणजीत, मोहित और विनोद को भेजा गया, लेकिन वे भी 10 दिनों में तकनीकी समस्या दूर नहीं कर पाए।​ लाखों का नुकसान और मानसिक तनाव परिवाद में कहा गया कि कंपनी के आदमियों द्वारा 10 पेपर रील, जिसकी कीमत 35,000 से 40,000 रुपये तक थी, खाली किए गए लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। परिवादी और उसके पिता जब कंपनी के मैनेजर से मिलने जाते तो वे अपने ऑफिस में नहीं मिलते थे। कंपनी ने उल्टा धमकी दी कि कर्मचारियों को बंदी बना दिया गया है और केस कर देंगे। परिवादी ने मशीनों की स्थापना के लिए फैक्ट्री, बिजली कनेक्शन सहित अन्य उपकरणों पर लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च किए, जो अब काम में नहीं आ रहे हैं। फैक्ट्री का किराया 1 लाख 31 हजार रुपये प्रति माह और बिजली का बिल 1 से 1.20 लाख रुपये तक आ रहा था, जो परिवादी नहीं भर पा रहे थे। कच्चा माल भी खरीदा गया था, जिसका कुछ समय बाद मूल्य शून्य हो गया।​ तनाव में 28 मई 2024 को हुआ निधन परिवादी नितिन भूरानी की ओर से 23 अगस्त 2023 को यह परिवाद प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान 18 जुलाई 2024 को परिवादी के अधिवक्ता ने प्रार्थनापत्र देकर सूचित किया कि परिवादी इस तनाव को नितिन झेल नहीं पाए और 28 मई 2024 को उनका निधन हो गया। 18 जून 2025 को परिवादी के उत्तराधिकारी रमेश भूरानी और सीमा भूरानी को रिकॉर्ड पर लिया गया। कंपनी की दलीलें खारिज कंपनी की ओर से आयोग में तर्क दिया गया कि बिल पर लिखा था कि विवाद का न्याय क्षेत्र ‘अंबाला’ होगा, इसलिए जोधपुर में केस नहीं चल सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि मशीनें ‘व्यावसायिक उद्देश्य’ के लिए थीं, इसलिए खरीदार ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी में नहीं आता। आयोग ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि नितिन ने मशीनें अपनी ‘आजीविका’ के लिए खरीदी थीं, इसलिए वह उपभोक्ता हैं। साथ ही, उपभोक्ता कानून के तहत परिवादी अपने निवास स्थान पर केस दर्ज करा सकता है। चूंकि कंपनी ने समय पर जवाब पेश नहीं किया था, इसलिए आयोग ने उनके खिलाफ एकपक्षीय (Ex-parte) कार्यवाही की। आयोग का आदेश: 45 दिन का अल्टीमेटम आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ‘मैकेनिकल सिस्टम्स’ के प्रोपराइटर सतीश कुमार वर्मा और मैनेजर सिद्धार्थ वर्मा को निम्नलिखित आदेश दिए: आयोग ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि 45 दिनों में पालना नहीं हुई, तो ब्याज की दर 6% से बढ़कर 9% हो जाएगी।

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