डॉ. पेंढारकर ने इंजीनियरिंग कॉलेज प्रभारी प्राचार्य के रूप में चार्ज लिया, इधर डॉ. श्रीवास्तव को ट्रांसफर पर मिला स्टे

इंजीनियरिंग कॉलेज में शुक्रवार को एक तरफ जहां सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. उमेश पेंढारकर ने प्रभारी प्राचार्य का चार्ज लिया, वहीं पूर्व प्राचार्य डॉ. जेके श्रीवास्तव को रीवा ट्रांसफर के आदेश पर हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। इंजीनियरिंग कॉलेज में डॉ. पेंढारकर और डॉ. श्रीवास्तव के बीच कुछ महीनों से विवाद चल रहा है। 12 दिनों के भीतर तीसरी बार प्राचार्य बदलने के आदेश जारी हुए। गुरुवार को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग ने डॉ. पेंढारकर को प्रभारी प्राचार्य का प्रभार सौंपने के आदेश जारी किए। आदेश में उन्हें संस्था प्रमुख एवं आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी घोषित किया गया। इसके बाद शुक्रवार दोपहर डॉ. पेंढारकर ने पदभार ग्रहण कर लिया। इधर, विभाग ने 23 नवंबर को डॉ. श्रीवास्तव को प्रोफेसर पद पर इंजीनियरिंग कॉलेज, रीवा ट्रांसफर का आदेश जारी किया था, जबकि डॉ. श्रीवास्तव केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं और उज्जैन के अलावा प्रदेश के किसी भी शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में यह ब्रांच नहीं है। इसके आधार पर डॉ. श्रीवास्तव ने मप्र हाईकोर्ट, इंदौर में याचिका दायर की थी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि उच्च न्यायालय से ट्रांसफर पर स्थगन मिला है। इस स्थिति में डॉ. श्रीवास्तव भी अब उज्जैन कॉलेज में रहकर केमिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में कार्य करेंगे। एक-दूसरे के खिलाफ जांच और शिकायतों से बढ़ता गया विवाद इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ रहते हुए डॉ. पेंढारकर और डॉ. श्रीवास्तव के बीच पुरानी अनबन चली आ रही थी। दोनों के बीच का विवाद तब गहराने लगा, जब डॉ. श्रीवास्तव के प्रभारी प्राचार्य रहते हुए उन्होंने डॉ. पेंढारकर के प्राचार्य कार्यकाल में कॉर्पस फंड से बिना स्वीकृति के 1.80 करोड़ रु. के फेस लिफ्टिंग कार्य को लेकर जांच करवाई। इसमें वित्तीय अनियमितता और दस्तावेजों को नियम विरुद्ध रखने एवं जांच समिति के समक्ष दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाने के संबंध में एफआईआर के लिए एसपी और नानाखेड़ा थाना प्रभारी को पत्र लिख दिए। इधर, जब डॉ. पेंढारकर प्रभारी प्राचार्य बने तो उन्होंने डॉ. श्रीवास्तव के कार्यकाल में हुई आर्थिक अनियमितताओं की एक छात्र संगठन की शिकायत पर जांच करवाई, जिसमें कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर डॉ. श्रीवास्तव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए विभागीय मुख्यालय को भी पत्र भेजा गया। प्राचार्य पद को लेकर दोनों में रस्साकसी भी चलती रही और दोनों न्यायालय तक भी पहुंचे। न्यायालय के निर्णय और याचिका को निरस्त करने के फैसले के बाद डॉ. पेंढारकर प्राचार्य बने और दूसरी बार फिर डॉ. श्रीवास्तव ने प्राचार्य का चार्ज लिया। नवंबर में जब डॉ. श्रीवास्तव प्रभारी प्राचार्य थे, तब आधी रात को डॉ. पेंढारकर ने कुछ फैकल्टी मेंबर के साथ कॉलेज भवन में प्रवेश किया, जिसको लेकर अगले दिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस को लिखित शिकायत कर एफआईआर की मांग की।

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