सीबीआई कोर्ट ने आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले दो आरोपियों को दोषी मानते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर विभिन्न धाराओं में 12-12 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। विशेष लोक अभियोजक चंद्रपाल ने बताया कि मुरैना के शासकीय कन्या महाविद्यालय में 30 सितंबर 2012 को आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा केंद्र में एक अभ्यर्थी की फोटो और हस्ताक्षर असली उम्मीदवार से मेल न खाने पर संदेह हुआ। जांच में पता चला कि परीक्षा में बैठा अभ्यर्थी वास्तविक उम्मीदवार नहीं, बल्कि फर्जी परीक्षार्थी था। पुलिस पूछताछ में उसने खुद को परवेंद्र सिंह बताया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि उसका असली नाम हरवेंद्र सिंह चौहान है। वह असली अभ्यर्थी रणवीर सिंह यादव के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। पुलिस ने उसी दिन एफआईआर दर्ज की, लेकिन केस का अभियोग पत्र 1 अगस्त 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया जा सका। जमानतदार ने खोला राज: आरोपी हरवेंद्र जमानत के बाद लंबे समय तक फरार रहा। इस पर पुलिस ने उसके जमानतदार जालम सिंह को पकड़ा। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि सॉल्वर का नाम परवेंद्र नहीं, बल्कि हरवेंद्र सिंह चौहान है। इसके बाद सीबीआई ने 6 दिसंबर 2017 को उसे गिरफ्तार किया। दोषी: रणवीर सिंह यादव, निवासी सुजानपुर (आगरा), 137 दिन जेल में रहा। हरवेंद्र सिंह चौहान, निवासी गांधीनगर (जयपुर), कुल 1459 दिन जेल में रहा। 10वीं बार में मिली जमानत :
पहली बार आसानी से जमानत मिलने के बाद हरवेंद्र को बाद में जमानत मिलने में पसीने छूट गए। 10वीं जमानत याचिका जब पेश की गई, तब तत्कालीन हाई कोर्ट ने बिना गुण दोष पर टिप्पणी करते हुए 26 नवंबर 2021 को आरोपी को उसे जमानत दी और 27 को वह जेल से बाहर आ सका।


