छतरपुर के नौगांव थाना क्षेत्र में पेट दर्द के इलाज के दौरान 34 वर्षीय व्यक्ति की जिला अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही और सही इलाज न मिलने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक की पहचान नौगांव निवासी सूरज पिता अमृत लाल बरार (34) के रूप में हुई। वह पुट्टी पुताई का काम करता था और उसके दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 5 और 8 साल है। शुक्रवार देर रात सूरज के पेट में दर्द उठा, जिसके बाद उसे नौगांव अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर विनीत शर्मा ने सूरज को चौथी मंजिल पर भर्ती किया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूरज के छोटे भाई ने आरोप लगाया कि वे रात डेढ़ बजे जिला अस्पताल पहुंचे थे, तब सूरज की हालत सामान्य थी। करीब तीन घंटे तक केवल नर्सों ने ही उसका इलाज किया। कई बार कहा, फिर भी डॉक्टर को नहीं बुलाया
भाई के अनुसार, सूरज की हालत बिगड़ती गई और उसने कई बार ड्यूटी डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सुबह 4:30 बजे उसकी हालत गंभीर हुई और उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हालत बिगड़ने पर डॉक्टर न होने के कारण उसे रेफर भी नहीं किया गया। सुबह 5:30 बजे डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और उसके बाद सूरज की मौत की पुष्टि की गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर आ जाते तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने सही इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि रात के समय डॉक्टर अक्सर कॉल ड्यूटी पर नहीं पहुंचते हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन शरद चौरसिया से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।


