प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी की रिलायंस पावर लिमिटेड और उसके 10 अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हुए एक चार्जशीट दाखिल की है। 2024 का ये मामला एक फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा है, जिसकी कीमत 68.2 करोड़ रुपए थी। यह गारंटी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) से एक टेंडर हासिल करने के लिए जमा की गई थी। ED की जांच में पता चला है कि रिलायंस ग्रुप के अधिकारी इस फर्जीवाड़े के बारे में पूरी तरह जानकार थे। आरोप क्या हैं?
ED का कहना है कि रिलायंस ग्रुप के अधिकारियों ने ‘कॉनिवेंस’ (साजिश) और ‘माला फाइड इंटेंशन’ (बुरे इरादे) से SECI का टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी गारंटी जमा की। विदेशी बैंकों से फर्जी गारंटी बनाई गईं, SBI के नाम पर फर्जी एंडोर्समेंट किए गए। फंड्स को गलत तरीके से रूट किया गया, फर्जी डॉक्यूमेंट्स इस्तेमाल किए गए। ED ने कहा कि रिलायंस पावर ने माला फाइड इंटेंट से बिस्वाल ट्रेडलिंक की सर्विसेज हायर कीं ताकि फर्स्ट रैंड बैंक (फिलपींस) और ACE इन्वेस्टमेंट बैंक (मलेशिया) से फर्जी गारंटी बने। यह सब मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपराध है। कौन-कौन शामिल हैं? मुख्य आरोपी अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
दिल्ली पुलिस EOW ने नवंबर 2024 में फर्जी गारंटी के लिए FIR दर्ज की। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की, 5.15 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की। अशोक पाल और अमर दत्ता को गिरफ्तार किया, जो अब ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। अनिल अंबानी ग्रुप की ₹10,117 करोड़ की संपत्ति जब्त
प्रवर्तन निदेशालन (ED) ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की 1,120 करोड़ रुपए की नई संपत्तियां अटैच की हैं। इसके साथ ही समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। पूरी खबर पढ़ें


