बैतूल जिले में भावांतर भुगतान योजना में अनियमितता सामने आई है। पंजीयन सत्यापन की जांच में पाया गया कि कुछ व्यक्तियों ने बिना सिकमी (बटाई/ठेका) के ही योजना में पंजीयन करा लिया था। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह गड़बड़ी भैंसदेही और चिल्कापुर प्राथमिक सहकारी समितियों के पंजीयन की जांच के दौरान उजागर हुई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम बांटलाकलां निवासी कृतिका धाड़से, रहियटदादु निवासी भावेश धाड़से और मीनाक्षी धाड़से ने बिना सिकमी के पंजीयन कराया था। वहीं, ग्राम जामझीरी निवासी सहादेव मकोड़े ने योजना शुरू होने से पहले ही नियमविरुद्ध पंजीयन करा लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि जिन किसानों की भूमि का नाम पंजीयन में दर्ज था, वे स्वयं अपनी जमीन पर खेती कर रहे थे और उन्होंने किसी को भी ठेका या बटाई पर जमीन नहीं दी थी। एसडीएम भैंसदेही ने बताया कि भावांतर योजना में किसान स्वयं या बटाईदार के रूप में पंजीयन कराता है। इस मामले में जिन किसानों का बटाईदार बनकर पंजीयन कराया गया, वे वास्तव में बटाईदार थे ही नहीं। इस फर्जीवाड़े में चार किसानों की लगभग 150 क्विंटल उपज का भुगतान करीब 7.5 लाख रुपये था। योजना के तहत उपज बेचने पर मॉडल रेट के हिसाब से उन्हें लगभग 1.80 लाख रुपये का लाभ मिलता, जिसे रोकने में सफलता मिली है। प्रशासन ने चारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। पंजीयन सत्यापन में लापरवाही बरतने पर तहसीलदार भीमपुर और नायब तहसीलदार झल्लार को नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले भी जिले में ज्वार खरीदी के दौरान पंजीयन में गड़बड़ी की कोशिशें सामने आई थीं। उस समय लगभग 1043 अवैध पंजीयन को असत्यापित कर शासन को करीब 26 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान से बचाया गया था।


