टाइगर कूदा तो गाड़ी हिली, शीशा धमाके के साथ टूटा:वनकर्मी बोले- शरीर कांप गया, लगा बाघ गाड़ी में आ गया, आंखें बंद गईं थीं

तारीख- 1 जनवरी समय- दोपहर 3 बजे सरिस्का से निकल कर ग्रामीण इलाके में घूम रहे टाइगर (ST-2404) ने 3 दिन तक दो जिलों (दौसा-अलवर) में जमकर दहशत फैलाई। 3 ग्रामीणों (1 महिला, 2 युवकों) पर हमला किया। ट्रैंकुलाइज करने आई वन विभाग की टीम के कैंट्रा गाड़ी पर भी हमला किया। इस हमले से गाड़ी में बैठे 5 कर्मचारियों का कलेजा मुंह को आ गया। वन विभाग के कर्मचारियों ने उन 2 सेकेंड को बयां किया, जब टाइगर गुस्से में था और कैंट्रा (वन विभाग की गाड़ी) के आधे खुले कांच (साइड ग्लास) में उसकी गुर्राहट साफ सुनाई दे रही थी। आसपास भीड़ और गाड़ियों के शोर से टाइगर बेहद गुस्से में था। वन विभाग के कर्मचारियों ने कहा- अगर शीशा खुला होता तो टाइगर के पंजे से हमारी खोपड़ी अलग हो जाती। अब तो सपने में भी टाइगर की वही गुर्राहट के साथ हमला दिखता है। खौफ के वो 2 मिनट
4 साल के टाइगर को ट्रैंकुलाइज करने वाले डॉ. दीनदयाल बताते हैं- हमने कई वन्यजीव ट्रैंकुलाइज किए हैं। लेकिन, ऐसा हमला पहली बार हुआ है। वह (बाघ) दौड़ता हुआ आया और सीधे वन विभाग की गाड़ी पर कूद गया। कूदते ही टाइगर ने पहला पंजा गाड़ी के साइड ग्लास पर मारा। ऐसा धमाका हुआ मानो किसी ने बड़ा सा पत्थर फेंका हो। हम सभी की आंखें बंद हो गई थीं। ये 2 सेकेंड 2 घंटे से कम नहीं थे। दूसरा पंजा टाइगर ने विंड शील्ड (गाड़ी का फ्रंट ग्लास) पर मारा, वह उतरा और चला गया। बस इन्हीं 2 सेकेंड में हमारी सांसें थम गई थीं। अब अंदर आया कि अब अंदर आया… ट्रैंकुलाइज करने के लिए आधा शीशा नीचे किया था
टाइगर को ट्रैंकुलाइज करने वाले डॉ. दीनदयाल कहते हैं- दौसा रेंज के निहालपुरा गांव में 1 जनवरी को दोपहर करीब 3 बजे का समय था। टाइगर के गांव में घुसने की सूचना पर हम यहां पहुंचे थे। गाड़ी दिनेश चला रहे थे। मैं आगे उनके पास बैठा था। गाड़ी की पिछली सीट पर रेंजर अभिषेक सहित 2 अन्य साथी थे। हमने गाड़ी उसी खेत में खड़ी की थी, जहां टाइगर था। हमारे अलावा भी टाइगर को घेरे हुए कई गाड़ियां खेत में थीं। दीनदयाल कहते हैं- टाइगर को ट्रैंकुलाइज करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया था। शुक्र रहा कि सहूलियत के लिए मैंने आधा ही शीशा नीचे किया था, वर्ना कोई बड़ा हादसा हो गया होता। धमाका हुआ, एक पंजे से पूरी कैंट्रा हिल गई
डॉ. दीनदयाल कहते हैं- कुछ सेकेंड ही बीते थे कि झाड़ियों में से अचानक बाघ भागता हुआ आया और ड्राइवर दिनेश की तरफ अटैक कर दिया। टाइगर ने इतनी जोर से पंजा मारा कि गाड़ी का ग्लास तेज आवाज के साथ टूट गया। हमें तेज धमाका सुनाई दिया था। हमारे हाथ से मोबाइल छूट गया। पूरी गाड़ी हिल गई, जैसे अब पलट ही जाएगी। ऐसे लगा मौत सामने है। एक बार तो आभास हुआ टाइगर अंदर आ गया। लेकिन दो सेकेंड बाद ही लगा कि टाइगर बैक हो गया। वापस अटैक कर देता तो शायद बच नहीं पाते। 2 दिन तक रात को यही सपने में आता रहा कि टाइगर ने अटैक कर दिया है। अटैक के समय नाखून बाहर आ जाते हैं
दीनदयाल बताते हैं- टाइगर का पंजा एक बड़े व्यक्ति के हाथ जितना होता है या इससे बड़ा भी हो सकता है। अटैक की पोजिशन में टाइगर का पंजा डेढ़ गुना बड़ा हो जाता है। उसका एक नाखून हम इंसानों की अंगुलियों से थोड़ा सा ही छोटा होता है। टाइगर के पंजे के नाखून साधारण रूप से अंदर रहते हैं। अटैक के समय नाखून सहित पूरा पंजा खुलता है। हमले के समय ही नाखून बाहर आते हैं। 4 साल का टाइगर गुस्से में था
दीनदयाल बताते हैं- वहां भीड़ अधिक होने के कारण टाइगर पर दबाव था, वह चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया था। महूखेड़ा में ग्रामीणों ने टाइगर पर पत्थर मार दिए थे। भीड़ भी अधिक हो गई थी। इससे वह से वह गुस्से में था। गाड़ियों से घिरा तो और अग्रेसिव हो गया था। इस टाइगर ने पहली बार रेंजर शंकर सिंह की गाड़ी की तरफ दो बार अटैक किया था। तब हम समझ गए थे कि टाइगर मुश्किल से कंट्रोल में आएगा। लेकिन, मजबूरी में उस समय खेतों में ट्रैंकुलाइज करने के लिए घेरना पड़ा। 200 किलो के टाइगर का रेस्क्यू
दीनदयाल बताते हैं- तीन जनवरी को सूचना मिली कि टाइगर चिल्का का बास में ग्रामीण के घर की रसोई में है। हमने खुले कैंट्रा वाहन की बजाय रेस्क्यू के लिए बख्तरबंद वाहन उपयोग में लेना मुनासिब समझा। इस रेस्क्यू वाहन की जाली को थोड़ा चौड़ा करना पड़ा। ताकि रसोई में बैठे टाइगर को ट्रैंकुलाइज किया जा सके। ऐसा ही किया गया। कांच वाली कार पर फिर से अटैक करने का डर था। 4 साल का टाइगर इतना बड़ा और भारी था कि उसे तुरंत 10 लोगों ने मिलकर गाड़ी में डाला। टाइगर का वजन 200 किलो है। पहली बार करीब से देखा टाइगर का हमला
फॉरेस्टर अभिषेक ने कहा- टाइगर को इतना अग्रेसिव नहीं देखा। पहले भी खूब टाइगर रेस्क्यू किए हैं। इससे पहले टाइगर ने गाड़ियों पर बहुत कम ही हमले किए हैं। यह भयावह दृश्य था। इससे पहले एक गांव में दीवार के बगल में टाइगर था। हम वहां पहुंचे तो टाइगर ने वहां अटैक करने के लिए दीवार पर आने की कोशिश की थी। ड्राइवर बोले – कंपकंपी नहीं रुकी
ड्राइवर दिनेश ने कहा- मैं बहुत डर गया था। मेरी आंखें बंद हो गई थीं। मैं ड्राइवर की सीट पर चिपका रह गया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उस समय ड्राइवर की तरफ का कांच आधा लगा हुआ था। एक ही पंजे में पूरा कांच बिखर गया। टाइगर दुबारा अटैक कर देता तो बच नहीं पाते। मुझे काफी देर तक कंपकंपी छूटती रही। हमने यह घटनाक्रम घर पर भी नहीं बताया है। आधे घंटे तक मैं गाड़ी चलाने की हालत में नहीं था। बाघ के दो जिलों में दहशत मचाने की ये खबरें भी पढ़िए… अलवर में टाइगर फार्महाउस के किचन से पकड़ा गया:बगल के खुले कमरे में सो रहा था कर्मचारी, 200 किलो का था, 10 लोगों ने उठाया टाइगर ने वन विभाग की टीम पर किया हमला, VIDEO:अलवर के कई गांवों में कर्फ्यू जैसे हालात; ग्रामीण बोले-दरवाजा खोला तो बाघ खड़ा था राजस्थान में टाइगर ने 3 लोगों पर हमला किया:महिला की पीठ पर कूदा, बचाने आए युवकों पर भी झपटा; वन-विभाग की गाड़ी के कांच फोड़े

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