दिव्य ज्योति जागृति संस्थान तरनतारन आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय साधना शिविर के दूसरे दिन साध्वी ज्योत्सना भारती ने प्रवचन किया। साध्वी जी ने कहा कि आज 21वीं सदी के वैज्ञानिक युग में मनुष्य के पास भौतिक सुख-सुविधाएं तो हैं, लेकिन मानसिक शांति के अभाव के कारण वह अशांति और अवसाद से ग्रसित है। उन्होंने ज्ञान को मानसिक शांति का एकमात्र उपाय बताते हुए कहा कि सनातन भारतीय संस्कृति मानती है कि मनुष्य ध्यान से ही शांति प्राप्त कर सकता है। साध्वी ने स्पष्ट किया कि ध्यान वैदिक सनातन पद्धति का विशुद्ध अंग है, जो ध्येय और ध्याता के संयोग से पूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि समस्त धार्मिक ग्रंथों में ईश्वर को प्रकाश स्वरूप बताया गया है। पूर्ण सत्गुरु की शरणागत होकर साधक ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा से अपनी दिव्य दृष्टि खोलकर ईश्वर के प्रकाश स्वरूप का दर्शन करता है। यही ध्यान की शाश्वत प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा संपूर्ण विश्व में निशुल्क ध्यान शिविर आयोजित कर विश्व को इस सनातन प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। शिविर में उपस्थित साधकों ने सामूहिक ध्यान साधना कर परम आनंद प्राप्त किया।


