सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन को कानूनी अपराध माने जाने वाले राजस्थान मृत शरीर सम्मान अधिनियम के नियमों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट के नोटिस के बावजूद प्रदर्शनकारी परिजन शव का 24 घंटे में अंतिम संस्कार नहीं करते हैं तो पुलिस कब्जे में लेकर करवा सकेगी। केस दर्ज और अनुसंधान एवं चालानी प्रक्रिया भी शुरू हो सकेगी। शव को सड़क या अन्य किसी स्थान पर रख प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ 6 माह से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। गौरतलब है कि राज्य में आए दिन शव रखकर मांगों को पूरा कराने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए दो साल पहले सरकार ने यह कानून बनाया था। बकाया बिल पर भी अस्पताल नहीं रोक सकेंगे शव मजिस्ट्रेट तामील करवाएंगे नोटिस- पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने 20 जुलाई 2023 को विधानसभा में अधिनियम पारित किया था। सजा के 4 बड़े प्रावधान 1 शव कब्जे में नहीं लिया तो: मृतक के परिजन अगर शव को कब्जे में नहीं लेते हैं तो एक साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों।
2 शव के साथ विरोध पर: परिवार के सदस्य शव का उपयोग प्रदर्शन के लिए करता है या अन्य व्यक्ति को विरोध करने के लिए अनुमति देता है तो परिजन को 2 साल तक की जेल या जुर्माने की सजा। 3 अन्य व्यक्ति के प्रदर्शन पर: परिवार से अलावा कोई व्यक्ति शव का उपयोग विरोध प्रदर्शन के लिए करता है तो 6 माह से 5 साल तक की सजा या जुर्माना।
4 गोपनीयता भंग करने पर: राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, में लावारिस शवों का जैनेटिक डाटा सुरक्षित रखा जाएगा। डाटा लीक करने वाले दोषी कर्मचारी या अधिकारी को 3 से 10 साल तक की सजा हो सकेगी।


