कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर आमजन की सुरक्षा में तैनात रहने वाले 39 हजार 185 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को ‘कर्मवीर योद्धा पदक’ दिया जा रहा है। इस सम्मान को लेकर पुलिस मुख्यालय द्वारा 1600 पेज की जो सूची जारी की गई है, उसमें काफी विसंगति सामने आई है। इंदौर के 5 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों के नाम तो सूची में हैं, लेकिन चारों डीसीपी जोन के 600 से ज्यादा कर्मचारियों के नाम नहीं हैं, जबकि इन कर्मचारियों ने भी कोरोना काल में लगातार परिवार से दूर रहकर ड्यूटी की थी।
सूची जारी होने के बाद से ही वे अधिकारी-कर्मचारी आहत हैं, जिनके नाम सूची में नहीं हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर पुलिस जवानों ने बताया, वे ड्यूटी के दौरान संक्रमण का भी शिकार हुए, लेकिन फिर भी ड्यूटी की। होटल, लॉज व स्कूल परिसर में क्वारेंटाइन रहे, अफसरों के साथ डटे रहे थे, लेकिन उन्हें इस पदक के लिए नहीं चुना गया। सूत्र बताते हैं, दफ्तर में बैठे बाबुओं ने ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची भेज दी जो फील्ड में तैनात तक नहीं थे। सम्मान नहीं मिलने से आहत पुलिसकर्मियों ने अब अपने-अपने जोन के डीसीपी को आवेदन लिखकर पीड़ा जताई है। फायर ब्रिगेड में पूरा स्टाफ नाराज
फायर ब्रिगेड में भी ऐसी ही कुछ स्थिति है। कोरोना काल में परिवार से दूर रहकर फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने भी जी जान से ड्यूटी की थी, लेकिन जो सूची आई है, उसमें फायर ब्रिगेड के सिर्फ तीन बाबुओं को ही कोरोना योद्धा के लिए चिह्नित किया है। 24 घंटे कंट्रोल रूम पर रहने वाले और आगजनी की घटना पर मौके पर पहुंचने वालों के नाम गायब हैं। 7 करोड़ बजट, प्रशस्ति पत्र व नकद इनाम भी ‘कर्मवीर योद्धा पदक’ के तहत सरकार ने पूरे प्रदेश के लिए 5 से 7 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। कोरोना योद्धा पदक पाने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र, पदक के साथ नकद इनाम
दिया जाएगा।
जो भी सम्मान के हकदार, उन्हें अवश्य मिलेगा
जो भी सम्मान के हकदार हैं, उन्हें सम्मान अवश्य मिलेगा। अगर गलती से किसी का नाम रह गया हो तो मुख्यालय स्तर पर बात कर इसमें सुधार करेंगे। – संतोष कुमार सिंह, पुलिस कमिश्नर, इंदौर


