धार जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए 12 संजीवनी क्लीनिकों में से केवल 8 ही संचालित हो रहे हैं। इनमें से भी आधे क्लिनिक बिना डॉक्टर के नर्सों के भरोसे चल रहे हैं। 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत इन क्लीनिकों में से 4 अभी भी अधूरे हैं। संचालित हो रहे 8 क्लीनिकों में स्टाफ की स्थिति संतोषजनक नहीं है। चार क्लीनिकों में मेडिकल ऑफिसर तैनात हैं, जबकि शेष चार क्लिनिक केवल नर्सों के भरोसे चल रहे हैं। प्रत्येक क्लिनिक पर सरकार ने लगभग 25 लाख रुपए खर्च किए हैं, लेकिन मेडिकल ऑफिसर की कमी के कारण कई स्थानों पर मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नौगांव स्थित संजीवनी क्लिनिक 3 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ था। शुरुआत में मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन अब प्रतिदिन 50 से 70 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इस क्लिनिक में रक्तचाप, शुगर और गर्भवती महिलाओं की जांच के साथ-साथ निशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। जल्द ही मरीजों को आईवी बोतल चढ़ाने की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, इंदौर नाका स्थित क्लिनिक का संचालन नए भवन के निचले हिस्से में हो रहा है, जबकि इसका ऊपरी भाग अभी भी अधूरा है। यहां मेडिकल ऑफिसर की तैनाती न होने के कारण मरीजों की संख्या बहुत कम है, जबकि क्लिनिक में आईवी बोतल चढ़ाने के लिए तीन बेड उपलब्ध हैं। शहरी सहायक कार्यक्रम प्रबंधक वंदना वर्मा ने पुष्टि की कि आठ संजीवनी क्लिनिक संचालित हैं। उन्होंने बताया कि चार क्लीनिकों में मेडिकल ऑफिसर उपलब्ध हैं, जबकि चार में इनकी कमी है। मरीजों को निशुल्क दवाइयां और उपचार प्रदान किया जा रहा है।


