मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में अफसरों ने हेराफेरी की है। दमोह से 31 दिसंबर को 200 लोगों का जत्था कामाख्या देवी यात्रा के लिए रवाना हुआ है। इनमें 10 बुजुर्ग निजी कारणों से यात्रा पर नहीं जा सकें तो अफसरों ने उनके टिकट ब्लैक में बेच दिए। सरकारी रिकॉर्ड में इन 10 बुजुर्गों को यात्रा पर जाना दिखाया लेकिन हकीकत में ये घर पर और इनके नाम से दूसरे लोग यात्रा कर रहे हैं। ये यात्री 6 जनवरी को दमोह आएंगे। दरअसल, यात्रा में जिन 200 लोगों की सूची तैयार की हैं, उस हिसाब से पटेरा के 4, जबेरा के 2 और पथरिया के 3 हितग्राही तीर्थ यात्रा पर नहीं गए। इसी तरह दमोह से एक हितग्राही यात्रा पर नहीं गया। इनकी जगह उन लोगों को यात्रा पर भेजा है, जिन्होंने मोटी रकम देकर इनके टिकट खरीदे हैं। एक्सपोज… ये लाेग अपने घर पर हैं लेकिन रिकॉर्ड में यात्रा कर रहे हैं ये हैं जिम्मेदार… जिनके नाम नहीं थे उन्हें भेज दिया
टिकट वितरण की जिम्मेदारी नगर पालिका दमोह के अनिल असाटी को सौंपी थी लेकिन उन्होंने वितरण में गड़बड़ी कर दी। पात्रों को टिकट न देकर जिनके नाम नहीं थे, उन्हें भेजा। इसमें हेराफेरी भी खूब की गई है। इससे पहले की यात्रा में भी असाटी ने गड़बड़ी की थी। तभी कलेक्टर ने उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया था। इस बार कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे इस हेराफेरी में अफसरों के भी शामिल होने का अंदेशा बना हुआ है। अब अपने बचाव में असाटी का कहना है कि कोई टिकट नहीं बेचा। जो वेटिंग में थे उन्हें भेजा गया है। ऐसे छह लोग हैं। अभी गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली, लिस्ट से जांच कराएंगे
मुझे गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली है। यदि यह बात है तो मैं इसकी जानकारी लेता हूं। लिस्ट बुलाकर उसकी जांच कराएंगे।
– सुधीर कुमार कोचर, कलेक्टर, दमोह


