दिव्यांग बच्चों का स्पेशल खेल:15 स्कूलों के 350 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, स्पेशल ओलपिंक खेलों के लिए भी ठोकी दावेदारी

विशेष बच्चों के हुनर और आत्मविश्वास को मंच देने के उद्देश्य से समाजसेवी संगठन गोल्डन एम्पथी (जीई) फाउंडेशन द्वारा आयोजित वार्षिक स्पोर्ट्स एवं ड्रॉइंग–पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन रविवार को दिव्यांग मैदान, सिविक सेंटर में किया गया। जीई फाउंडेशन के संयोजक प्रदीप पिल्लई ने बताया कि संस्था पिछले एक दशक से विशेष रूप से सक्षम बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उड़ान कार्यक्रम के माध्यम से हर वर्ष विशेष बच्चों को खेल और कला के जरिए अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अवसर दिया जाता है। इस बार आयोजन में दुर्ग, भिलाई, रायपुर, राजनांदगांव और धमतरी के 15 स्कूलों से आए लगभग 350 बच्चों ने हिस्सा लिया। स्पेशल ओलंपिक्स भारत के सहयोग से हुई प्रतिस्पर्धाएं
कार्यक्रम में स्पेशल ओलंपिक्स भारत के अंतर्गत खेले जाने वाले बॉलिंग, बुच्ची, क्रिकेट, फुटबॉल, हैंडबॉल, स्विमिंग समेत कई स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है। इन बच्चों के बीच पहली बार बुच्ची खेल का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने काफी पसंद किया। बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार टीमों में शामिल किया गया और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बताया जा रहा है कि यह आयोजन का 10वां वर्ष है। राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सम्मानित
कार्यक्रम में स्पेशल ओलंपिक्स, एशियन गेम्स और नेशनल स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके विशेष बच्चों को मंच पर सम्मानित किया गया। उनके प्रशिक्षकों (कोच) को भी स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजन में दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल, मनीष पांडेय समेत अन्य अतिथि शामिल हुए। बच्चों ने पूरे उत्साह से खेलों में भाग लिया
स्पेशल ओलंपिक्स भारत के एरिया डायरेक्टर डॉ. प्रमोद तिवारी ने बताया कि संस्था 30 से अधिक खेलों में विशेष बच्चों को प्रशिक्षण देती है। उन्होंने कहा कि बुच्ची, क्रिकेट, फुटबॉल, हैंडबॉल और स्विमिंग जैसे खेलों में छत्तीसगढ़ के कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रहे हैं। संस्था का लक्ष्य है कि खेल और कला के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता विकसित की जाए। आयोजकों ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और बड़े स्तर पर करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक विशेष बच्चे लाभान्वित हो सकें।

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