स्लीपर फैक्ट्री के मजदूरों को हड़ताल 8वें दिन भी जारी:रेल्वे स्लीपर बनाने वाली फैक्ट्री पर मजदूरों के शोषण का आरोप

मेड़ता उपखंड की छापरी ग्राम पंचायत में संचालित एसीसी प्राइवेट लिमिटेड स्लीपर फैक्ट्री के मज़दूर पिछले 7 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं आज आठवां दिन है लेकिन कम्पनी प्रशासन से अभी तक किसी प्रकार की वार्ता मजदूरों से नहीं कि गई है । इस हड़ताल के कारण रेल्वे के लिए स्लीपर बनाने वाली फैक्ट्री में स्लीपर बनाने का कार्य पूरी तरह से रुक गया है। श्रम कानूनों की नहीं हो रही पालना ​मज़दूरों ने कंपनी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनसे 12 से 15 घंटे तक काम करवाया जाता है, लेकिन इसके बदले में उन्हें किसी प्रकार का ओवर टाइम मानदेय नहीं दिया जाता। इसके अलावा, फैक्ट्री में मज़दूरों के लिए कोई मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं है। ​सबसे बड़ी शिकायत यह है कि कई कर्मचारी 10 से 20 सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन कंपनी ने उन्हें आज तक जॉइनिंग लेटर (नियुक्ति पत्र) भी नहीं दिया है। मज़दूरों ने कंपनी प्रशासन पर उनका शोषण करने का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द उनकी मांगों को पूरा करने की मांग की है। श्रमिकों की मांगें हड़ताल पर बैठे श्रमिक इन मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं ​ओवरटाइम भुगतान: ​कानून के अनुसार, 8 घंटे की ड्यूटी दी जाए। अगर 8 घंटे से ज़्यादा काम किया जाता है, तो अतिरिक्त समय का ओवरटाइम भुगतान, गणना करके दिया जाए। ​ईएसआई (ESI) सुविधा का लाभ: ​श्रमिकों के मासिक ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) योगदान के बावजूद, उन्हें इसका कोई लाभ/सुविधा नहीं मिल रही है। ​मांग है कि यदि कोई श्रमिक मकराना में दी गई ईएसआई डिस्पेंसरी जाता है, तो ऑफिस का कोई व्यक्ति उसके साथ जाए और उसके इलाज की पूरी प्रक्रिया (ट्रीटमेंट प्रोसीजर) करवाए। ​ आईडी कार्ड (पहचान पत्र): ​कंपनी की ओर से आईडी कार्ड दिया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति कंपनी में ड्यूटी कर रहा है और कंपनी का ही कर्मचारी है। ​ स्थानीय चिकित्सा सुविधा: ​स्थानीय क्षेत्र में (लोकल में) डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में (इमरजेंसी) डॉक्टर उनका इलाज कर सके। ​आपातकालीन परिवहन (गाड़ी की सुविधा): ​ कंपनी एक देहाती (ग्रामीण) इलाके में है, इसलिए श्रमिकों को आपातकालीन स्थिति में (इमरजेंसी) अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी (वाहन) की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ​हड़ताल पर बैठे मज़दूरों में बसीर और रतनेश कुमार ने बताया कि कंपनी प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है, फेक्ट्री में श्रम कानूनों के हिसाब से काम नहीं हो रहा है और हमरा शोषण किया जा रहा है| कम्पनी की तरफ से सुलह के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हड़ताल पर बेठे मजदूरों का कहना है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं की जाती हम हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे | ​वहीं, कंपनी प्रशासन ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। कम्पनी के स्थानीय मेनेजर विवेक पोदार ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और मज़दूरों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। मज़दूरों और कंपनी प्रशासन के बीच गतिरोध जारी रहने के कारण फैक्ट्री में उत्पादन पिछले सात दिनों से पूरी तरह ठप है।

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