बूंदी के जनाना अस्पताल में 8 महीने की गर्भवती महिला की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने शव को अस्पताल के मुख्य गेट पर रखकर करीब 6 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि महिला को समय पर खून नहीं चढ़ाया गया और इलाज में लापरवाही बरती गई। इसी कारण खून की कमी से जूझ रही महिला मरीज की मौत हो गई।
वहीं मामले में संबंधित स्टाफ को वार्ड से हटा दिया गया है और 4 डॉक्टरों की जांच कमेटी गठित की गई है। ड्यूटी डॉक्टर को भी हटाकर सीएमएचओ कार्यालय में लगाया गया है। इन फोटोज में देखिए पूरा मामला… परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों ने बूंदी जनाना अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि खून की कमी से जूझ रही मरीज को समय पर रक्त नहीं चढ़ाया गया और लापरवाही बरती गई।
दरअसल चौतरा का खेड़ा निवासी मदन सिंह (42) की पत्नी इंदिरा (40) के परिजनों के अनुसार, मरीज को रातभर बिना खून चढ़ाए टालते रहे। लगातार गुहार के बावजूद न तो स्टाफ ने गंभीरता दिखाई और न ही रक्त उपलब्ध कराया गया। सुबह महिला की मौत होने के बाद उसे कोटा के जेके लोन अस्पताल रेफर कर दिया गया। शव कोटा से बूंदी लाकर किया प्रदर्शन
इसके बाद गुस्साए परिजनों ने शव को कोटा जेके लोन अस्पताल से बूंदी लाकर जनाना अस्पताल के मुख्य गेट पर रख दिया। उन्होंने करीब 6 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हंगामा किया। 4 डॉक्टरों की जांच कमेटी बनाई
मामले की जानकारी मिलने पर विधायक हरिमोहन शर्मा ने प्रशासन को सूचित किया। कोतवाली थाना प्रभारी भंवर सिंह और कार्यवाहक पीएमओ डॉ. सुरेश अग्रवाल ने परिजनों से बात की। उन्होंने बताया कि संबंधित स्टाफ को वार्ड से हटा दिया गया है और 4 डॉक्टरों की जांच कमेटी गठित की गई है। ड्यूटी डॉक्टर को भी हटाकर सीएमएचओ कार्यालय में लगाया गया है। हालांकि, परिजनों ने आरोप लगाया कि कोई प्रशासनिक अधिकारी या पीएमओ मौके पर मौजूद नहीं थे। दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन
लगभग ढाई घंटे बाद एसडीएम, तहसीलदार और डीएसपी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों को बताया कि कलेक्टर ने एडीएम, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और सीएमएचओ से मामले की जांच करवाने के आदेश दिए हैं।
साथ ही, ड्यूटी डॉक्टर को एपीओ करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच में दोष सिद्ध होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


